25 दिन पहले निर्मित हुआ नाला बारिश में 15 दिनों में दो बार हुआ ध्वस्त
ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री के गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की
महराजगंज। निचलौल क्षेत्र की ग्रामसभा खेसरहा शितलापुर में 10 लाख रुपये की लागत से बनी 300 मीटर नाली 15 दिनों में दो बार बारिश में ध्वस्त हो चुकी है।नाली का निर्माण मात्र 25 दिन पहले कराया गया था। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीण मोहन ने बताया कि जब नाली का निर्माण शुरू हुआ था तो लगा था कि वर्षों की पानी निकासी की समस्या खत्म हो जाएगी। नाली न होने के कारण पानी निवासी की गांव में गंभीर समस्या थी। लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। निर्माण के कुछ दिनों बाद ही बारिश में दो बार भरभराकर नाला गिरने से सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि नाले के निर्माण में शुरू से ही निम्न स्तर के सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इसमें कम सीमेंट और सफेद बालू का उपयोग किया गया। पहली बार गिरने के बाद भी अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब दूसरी बार नाला ध्वस्त होने से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रमोद गुप्ता ने बताया कि घटिया निर्माण के कारण नाला टिक नहीं सका। यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच होती तो आज यह स्थिति नहीं होती। संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पूर्वांचल किसान यूनियन के संस्थापक सदस्य घनश्याम शुक्ला ने कहा कि जनहित से जुड़े इस निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए। उन्होंने तकनीकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कर गुणवत्तापूर्ण तरीके से नाले का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
स्पीकअप
नियम के अनुसार नाली का निर्माण नहीं किया गया है। नाली निर्माण में अनियमितता बरती गई है। 15 दिन के अंदर दो बार नाली टूट चुकी है।
- नाथू गुप्ता, शीतलापुर
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ठीक से नाली निर्माण कार्य नहीं हुआ है। अगर मानक के अनुसार नाली का निर्माण किया गया होता तो मात्र दो सप्ताह में ही दो बार नाली ध्वस्त नहीं होती।
- विनोद गुप्ता, शीतलापुर
वर्जन
निर्माण कार्य के गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। दो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई कराई जाएगी। ठेकेदार ही इसकी भरपाई करेगा।
- संतोष कुमार यादव, खंड विकास अधिकारी