अनुचर ने बताया 15 दिन से रहते थे गुमसुम
राजकीय पशु चिकित्सालय बसंतपुर थी पत्नी की तैनाती
नौतनवां। डॉ. परमात्मा सिंह का अचानक जिंदगी से हारकर चले जाना न सिर्फ उनके सहकर्मियों, बल्कि रतनपुर क्षेत्र के लोगों को हैरत में डाल रहा है। क्योंकि किसी को उनके सरल व हंसमुख मिजाज से ऐसा कदम उठाने की उम्मीद नहीं थी। उनकी आत्महत्या का मामला शुक्रवार को पूरे नौतनवां क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। कार्यालय के कर्मियों ने बताया कि वह 15 दिनों से गुमसुम रह रहे थे।
राजकीय पशु चिकित्सालय रतनपुर में डॉ. परमात्मा सिंह की तैनाती 2018 से थी। ग्रामीणों में सेवा भाव के चलते उनकी अलग साख थी। पशुपालक नूरजहां ने बताया कि डॉक्टर परमात्मा के बारे में सुनकर हैरत में पड़ गई थी। इसलिए अस्पताल पहुंचकर तैनात अन्य कर्मियों से इसकी पुष्टि की। जुलाई में नूरजहां की गाय को लू लगी तो डॉक्टर परमात्मा तीन दिन उनके घर उपचार के लिए आए। नूरजहां ने आगे बताया कि विश्वास नहीं होता कि इतने अच्छे स्वभाव का व्यक्ति इतने गहरे तनाव से जूझ रहा था।
रतनपुर में तैनात अनुचर संजीव कुमार चौधरी ने बताया कि डॉ. परमात्मा बहुत हंसमुख थे। हम लोगों को अक्सर चुटकुले सुनाकर ऑफिस का माहौल हल्का रखते थे। रतनपुर में ही तैनात पैरावेट इंद्रजीत ने बताया कि डॉ. परमात्मा के साथ उनकी पत्नी डॉ. सावित्री सिंह भी राजकीय पशु चिकित्सालय बसंतपुर घुघली में तैनात थीं। हर रोज दोनों गोरखपुर से ड्यूटी पर अपनी कार से आते-जाते थे। 15 दिन से वह कुछ गुमसुम थे। हम लोग पूछते तो कुछ तबीयत न ठीक होने की बात कहते थे। क्षेत्र में लोग उन्हें बड़ा सम्मान देते थे। उनके बारे में सुनकर ग्रामीण आज अस्पताल लगभग पूरे दिन आते रहे।