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Maharajganj News: मिठाई कब बनी पता नहीं...खरीदने के बाद पता चलती है असलियत

Tue, 29 Oct 2024 02:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। दुकानों में शोकेस में रखी गई मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट का स्टीकर लगाने का नियम है, लेकिन शहर से लेकर कस्बों तक दुकानों पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है। खासतौर पर त्योहारों में भी जिम्मेदार इसको लेकर संजीदा नहीं हैं। जिम्मेदार अभियान के दौरान ही सिर्फ जागरूकता दिखाते हैं, इसके बाद व्यवस्था का पालन करने पर जोर नहीं दिया जाता। यही वजह है कि मिठाइयों को खरीदने के बाद उसकी असलियत पता चलती है। इसे लेकर अक्सर नोक-झोंक भी होती रहती है।
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दीपावली पर्व पर मिठाई की खपत अधिक होती है। ताजा मिठाइयों को लेकर पड़ताल की गई। शहर में काॅलेज रोड पर ज्यादातर दुकानों के काउंटर में रखी रंग-बिरंगी मिठाइयों की ट्रे पर एक्सपायरी डेट का स्टीकर नहीं लगा था। इससे मिठाई कब बनी है, इसके बारे में कोई जान नहीं पाएगा। एक दुकान के पास धीरेंद्र यादव पहुंचे। वह दुकानदार से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भैया दो दिन पहले जो रसगुल्ला ले गया था, वह खाने में हल्का खट्टा लग रहा था। इसे वापस लेकर दूसरा दे दीजिए। दुकानदार उनकी बात को सुनने के लिए तैयार नहीं था। अपनी बात कहते हुए धीरेंद्र ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही, यह सुनते ही दुकानदार आक्रोशित हो गया। गनीमत रही कि मारपीट नहीं हुई।
यह तो एक नमूना था, ऐसे मामले में शहर में अक्सर होते रहते हैं। कुछ दुकानदार तो मामला सामने आने पर ग्राहक से शांतिपूर्वक समझ लेते हैं, इस वजह से मामला आगे नहीं बढ़ता है। इसी तरह से शहर में अन्य हिस्सों में मिठाई की दुकानों पर मिलावट का खेल चल रहा है। लोग त्योहारों पर मिठाइयों को खा लेते हैं, इसके बाद उन्हें पता चलता है कि मिलावटी मिठाई खाई है। जिले में त्योहारी सीजन में 550 क्विंटल से अधिक खोवे की खपत होती है। इन खोवे से लिक्विड और सूखी मिठाई बनाई जाती है। इन मिठाइयों को खाने का एक निर्धारित समय भी होता है। उसके बाद मिठाइयों को खाने से लोग बीमार ही पड़ेंगे। जिले के लगभग 80 प्रतिशत दुकानदार मिठाई बनाने और खराब होने की तिथि नहीं लिख रहे हैं।
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बूंदी लड्डू और बेसन के नमूने लिए गए
महराजगंज। खाद्य सुरक्षा विभाग ने नौतनवा क्षेत्र में स्थित विभिन्न दुकानों की जांच की। दुकानों के जांच के दौरान मिठाइयों का नमूना लेकर प्रयोगशाला में भेज दिया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके उपाध्याय ने बताया कि नौडिहवा चौराहा पर स्थित लड्डू निर्माण इकाई की जांच हुई। यहां पर बूंदी लड्डू और बेसन के नमूने लिए गए। निर्माण प्रक्रिया और सामग्री की गुणवत्ता की जांच की गई। इसके बाद, मिठाई के कारखाने का निरीक्षण किया गया। जहां पर खोया, छेना मिठाई और देशी घी का नमूना लिया गया। इसके अलावा बालाजी स्वीट्स के कारखाने का निरीक्षण किया गया, जहां पर पनीर और बेसन के नमूने लिए गए हैं। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी अंकित सिंह, हंसराज प्रसाद और रंजन श्रीवास्तव मौजूद रहे। संवाद


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अनसेफ : जो खाने योग्य न हो। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो। इससे जान भी जा सकती है। इसमें एक लाख रुपये तक जुर्माना और दह महीने की सजा का प्रावधान है।

सब स्टैंडर्ड : जो मानकों पर खरे नहीं उतरते। इसमें 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

मिस ब्रांड : प्रोडक्ट पर दी गई जानकारी पूरी न हो। इसमें 3 लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है।

मिस लीडिंग : प्रोडक्ट के लेबल के अनुसार खाद्य पदार्थ न हो। इसमें 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
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घी में बनी सस्ती मिठाई शुद्ध हो, इसकी गारंटी नहीं

महराजगंज। मिलावट करने वाले घी जैसी खुशबू वाली मिठाइयां बाजार में उतार दी हैं। असल में ये मिठाइयां शुद्ध देशी घी में नहीं बनी होती हैं। एक ऐसा लिक्विड प्रयोग किया जा रहा है, जिसे मिठाई पर डाल दिया जाए तो खुशबू असली घी जैसे आने लगती है।

पूरा खेल कैसे होता है, इसे समझने के लिए एक जानकार से संपर्क करना पड़ा। उसने बताया कि वनस्पति ऑयल का एक भाग और तीन भाग रिफाइंड ऑयल मिलाया जाता है। इसे गाढ़ा व मीठा बनाने के लिए इसमें वनीला एसेंस (पाउडर) का प्रयोग होता है। पूरा मिश्रण तैयार हो जाने के बाद रसायन प्रोपलीन ग्लाइकोल की दो बूंद डाली जाती है। दिल्ली, लखनऊ से आने वाला यह रसायन 1400 रुपये किलो के भाव मिलता है। शहर में घी वाली मिठाइयों को रेट 500 से 800 रुपये प्रति किलो के बीच है। जानकार बताते हैं कि शुद्ध घी वाली मिठाई बनाने पर कम से कम 1300 रुपये प्रति किलो का खर्चा आएगा। सस्ता बेचने के चक्कर में यह खेल कर ग्राहक को चूना लगा दिया जाता है।

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वनिला एसेंस से आता है इसमें स्वाद

जानकार बताते हैं कि देसी घी जैसा स्वाद और खुशबू लाने के लिए सबसे अधिक वनिला एसेंस का उपयोग किया जाता है। इस एसेंस (अर्क) को सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं माना जाता, इसीलिए पकड़े जाने पर कोई खास कार्रवाई भी नहीं होती। फूड एक्सपर्ट वनिला एसेंस को मसाला की श्रेणी में रखते हैं। वनिला की फलियां बेल में उगती हैं, जिन्हें उन्हें तोड़कर सुखाया जाता है। इससे एक पदार्थ निकलता है, जिसको पानी के जरिए अर्क (एसेंस) बना लिया जाता है। इसे चीनी डालकर वनिला पाउडर बना लिया जाता है। इसकी खेती इंडोनेशिया, मैक्सिको आदि देशों में होती है।

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मिलावटी खाद्य पदार्थ सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। मिलावटी घी वाली मिठाई से गैस्ट्रिसाइटिस की समस्या होती है। हानिकारक रसायनों के चलते अपच, उल्टी-दस्त होने की आशंका बनी रहती है। अगर कोई लंबे समय पर प्रयोग करें तो स्वास्थ्य संबंधी समस्या बढ़ सकती है।
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-डॉ. एएम भाष्कर, फिजिशियन
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