बी-गैप के ठोकरों में कटान, जिम्मेदार बेपरवाह
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महराजगंज/निचलौल। पहाड़ों पर बारिश से गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि का दबाव बी गैप बांध की ठोकर नहीं झेल पाएंगे। पहाड़ो पर बारिश के कारण नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से बांध के ठोकरों में तेजी से कटान होने लगा है। कटान की गति तेज होते देख बांध से सटे गांव नर्सरी, पडीरामनगर, सकरदीन्ही, छोटकीबारी, मरचहवा सहित कई अन्य गांवों के लोग भयभीत हैं। वही बांधों की मरम्मत भी धीमी गति से हो रही है।
बी गैप बांध ठोकर नंबर 9 ए, बी तथा 10 में कटान ज्यादा हो जाने के कारण बांध से सटे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। गंडक नदी के बी गैप बांध के तेरह ठोकरों में से अधिकांश में पिछले साल भी कटान हो गया था। सिंचाई विभाग के खंड द्वितीय ने मरम्मत कराकर कटान रोक दिया था, लेकिन कुछ समय बाद ही कटान रोकने के लिए बना ब्लॉक नदी में बह गया। कहा जा रहा है कि इस बार यदि जिम्मेदारों ने समय रहते बंधो की मरम्मत नहीं कराई तो बरसात के मौसम में कभी भी गंडक नदी तबाही मचा सकती है। नेपाल राष्ट्र के गांव नर्सरी निवासी पुजारी, कैलाश, सुशील थापा, उतपल गुरु, मनीष थापा का कहना है कि नेपाल की उच्च हिमालय पर्वत श्रेणी से निकलने वाली गंडक नदी के दाएं तट पर स्थित नेपाल सीमा तक के भू-भाग को बाढ़ और कटाव से बचाने की जिम्मेदारी एक समझौते के तहत भारत को दी गई है। जिसके तहत ए गैप बांध की लंबाई 2.5 किलोमीटर तथा बी गैप बांध की लंबाई 7.23 किलोमीटर, नेपाल बांध की लंबाई 12 किलोमीटर व लिंक बांध की लंबाई 2.5 किलोमीटर है। इनका निर्माण उत्तर प्रदेश सिंचाई और जल संसाधन विभाग खंड द्वितीय महराजगंज की तरफ गया था। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जिन बंधों के ठोकरों का समय से पहले कटान हो रहा है, उन सभी ठोकरों की मरम्मत कराने के लिए मातहतों को निर्देश दिए गए हैं। समय से पहले सभी कार्य पूरे करा लिए जाएंगे।