महराजगंज। मानसूनी सीजन में अधिक बारिश से खराब होने वाली सब्जी की फसलों को बचाने के लिए मचान विधि काफी उपयोगी हो सकती है। कृषि विभाग के मुताबिक मचान विधि को अपनाकर किसान 35 फीसदी तक पैदावार को बेहतर कर सकते हैं। जिले में 180 हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है।
जिले में किसानों का एक तबका परंपरागत खेती को छोड़कर सब्जियों की खेती की ओर आकर्षित हुआ है। इस वर्ष कृषि व उद्यान विभाग के समन्वय से 200 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सब्जी की खेती कराने का लक्ष्य है। किसानों की समस्या है कि मानसून सीजन में जब अधिक बारिश होती है तो कई सब्जी की फसलें पानी के कारण खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ऐसे में किसान मचान विधि को अपनाकर फसलों को बचा सकते हैं।
जिला कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस पद्धति से खेती करने पर सब्जी की ग्रेडिंग, क्वालिटी उत्तम होती है। मचान विधि से खेती करने पर पौधे करीब तीन फीट ऊपर हो जाते हैं। इसे मचान बनाकर ऊपर चढ़ा दिया जाता है। इससे सब्जी खराब नहीं होती। इसके अलावा बीमारी और कीड़ों से दूर रहती है।
बारिश के मौसम में करेला, तोरई, लौकी, लोबिया, नेनुआ आदि सब्जियां गल जाती हैं। इससे सब्जियों के दाम भी बढ़ जाते हैं। पौधा गलने के कारण किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है। किसान मचान पद्धति से खेती कर पैदावार 35 फीसदी तक बढ़ा सकते हैं। इसके बारे में कृषकों को जागरूक करने के लिए शीघ्र कार्यशाला आयोजित होगी।