महराजगंज। बड़े शहरों में रहकर रोजगार करने वाले परदेशी सावन के महीने में घर लौट रहे हैं। इसकी बड़ी वजह राशन कार्ड से नाम कटने का डर है। कहा गया है कि यदि संबंधित की ई-केवाईसी नहीं हुई तो राशन नहीं दिया जाएगा।
पूर्ति विभाग की ओर से राशन कार्ड और उसमें दर्ज सभी यूनिट का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें बायोमिट्रिक तरीके से लाभार्थियों की ई-केवाईसी की जा रही है। पूर्ति विभाग का कहना है कि बहुत से लोग जिले से विस्थापित होकर दूसरे शहरों में रहने लगे हैं। उन्हें अब राशन की जरूरत नहीं रह गई है। कुछ की मौत भी हो चुकी है। जिनका नाम अभी तक नहीं कटवाया गया है। राशन कार्ड सत्यापन के जरिये विस्थापित और जिनकी मौत हो गई है उनका नाम बाहर हो जाएगा।
जिला पूर्ति अधिकारी एपी सिंह ने बताया कि विस्थापित लोगों को ही अलग करने के लिए सत्यापन अभियान चलाया गया है। जानकारी मिल रही है कि विस्थापित परदेशी घर आकर ई-केवाईसी भी पूरी कर दे रहे हैं। फिर भी ऐसे ही लोग लौट रहे हैं जो कि पूरी तरह से विस्थापित नहीं हुए हैं। जिनका घर से अभी तक जुड़ाव है। ई-केवाईसी के बाद बड़ी संख्या में यूनिट अलग भी हो जाएगी।
राशन कार्ड में दर्ज प्रत्येक यूनिट के लिए प्रति माह पांच किलो अनाज का वितरण किया जाता है, जिसमें तीन किलो चावल व दो किलोग्राम गेहूं शामिल है। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि किसी कार्य से बाहर गए लोग उत्तर प्रदेश में कहीं भी ई-केवाईसी कर सकते हैं। परिवार के मुखिया के नंबर पर एक ओटीपी आएगी जिसे बताकर कार्य पूर्ण कराना होगा बताया कि जिले में अबतक ई-केवाईसी का ग्राफ 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।