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Maharajganj News: जिले में हर दूसरे दिन सड़क हादसे में मौत

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महराजगंज। जिले में सड़क हादसों की रफ्तार कम नहीं हो रही। इस साल अब तक 405 सड़क दुघर्टनाओं के मामले दर्ज किए गए हैं। जिसमें 262 लोगों की जान जा चुकी है। हर दूसरे दिन एक व्यक्ति की मौत सड़क हादसे में हो रही है। इस साल सड़क दुर्घटनाएं और मौतें दोनों पहले से ज्यादा बढ़ी हैं। परिवहन और यातायात विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसों की मौतें हेलमेट न पहनने के कारण हो रही हैं। इसके अलावा, तेज रफ्तार, नशा और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी दुर्घटनाओं के मुख्य कारण हैं।
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जानकारी के अनुसार, जिले में यातायात नियमों की अनदेखी लोगों पर भारी पड़ रही है। बाइक सवारों की लापरवाही और यातायात नियमों की अवहेलना के चलते हादसों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अगस्त माह के आंकड़ों पर नजर डाले तो एक महीने में ही 29 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई है। खास तौर पर बाइक सवारों की मौतों की संख्या अधिक है, जो हेलमेट न पहनने की वजह से हो रही है। इसके बावजूद लोग यातायात नियमों का पालन करने के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर कई प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आने के बजाय यह और बढ़ रही है। सड़क सुरक्षा समिति की योजनाएं भी इन हादसों को रोकने में कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि का मुख्य कारण लापरवाह ड्राइविंग, तेज गति, नशे की हालत में वाहन चलाना और यातायात नियमों का पालन न करना है। खासकर युवा बिना हेलमेट के बाइक चलाने, स्टंटबाजी करने और तेज रफ्तार में वाहन चलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। यह न केवल उनके अपने जीवन को खतरे में डालता है बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी जोखिम पैदा करता है। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे की कमी भी हादसों का एक बड़ा कारण बन रही है। जिले में कई प्रमुख स्थानों पनियरा, चौक, हरपुर, समरधीरा, डिंगुरी, मुजुरी, महदेवा, लक्ष्मीपुर और कौवाठोड़ में सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजामों का अभाव है। इन क्षेत्रों में संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर, साइन, स्पीड ब्रेकर, जेब्रा क्रॉसिंग और रोड मार्किंग जैसी सुविधाएं न के बराबर हैं। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम न होने के कारण हादसों की आशंका और बढ़ जाती है। साथ ही सड़कों के किनारे उगी झाड़ियां भी दृश्यता को प्रभावित करती हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो रही हैं। जबकि हाईवे निर्माण कार्य भी सड़क हादसों को बढ़ाने में एक बड़ा कारण बन रहा है। फ्लाईओवर और सड़क निर्माण स्थलों पर कार्यदायी संस्थाओं की ओर से सुरक्षा के लिहाज से कोई संकेतक बोर्ड या चेतावनी संदेश नहीं लगाए गए हैं। इससे वाहन चालकों को निर्माण कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती और हादसे होने की संभावना बढ़ जाती है। लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से सड़क सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। सड़क हादसों को रोकने के लिए यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। लोगों को हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके बावजूद, लोग इन नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यातायात पुलिस की ओर से नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा के लिए केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं,बल्कि सड़क के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने की जरूरत है।
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सड़क हादसों पर अंकुश के लिए चला अभियान, 35 हजार से अधिक वाहनों पर कार्रवाई

संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। यातायात व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने और सड़क हादसों पर रोकथाम के लिए यातायात पुलिस ने बड़े स्तर पर चेकिंग अभियान चलाया। अभियान के दौरान नियमों की अनदेखी करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की गई। पुलिस की इस कार्रवाई में इस साल अब तक कुल 35,302 वाहनों के चालान किए गए हैं। इसमें 2,857 वाहनों से 30,07,400 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया है।
यातायात पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों में सबसे अधिक मामले रांग साइड में चलने वाले वाहनों के रहे। इस श्रेणी में 311 चालान किए गए। वहीं, ओवर स्पीड के चलते 16 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। स्कूल वाहनों की जांच के दौरान भी कई खामियां सामने आईं। जिले में 51 स्कूली वाहन मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। जिन पर जुर्माना लगाया गया। नशे की हालत में वाहन चलाने वालों पर 23 ई-चालान किए गए। बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों की लापरवाही भी बड़ी संख्या में सामने आई। इस श्रेणी में 1,619 चालान बनाए गए। इसके साथ ही बिना सीट बेल्ट लगाए चल रहे 54 वाहन चालकों को भी नहीं बख्शा गया। वायु प्रदूषण की जांच में 31 वाहन मानक के अनुरूप नहीं पाए गए, जबकि 52 वाहनों की फिटनेस प्रमाणित नहीं होने पर कार्रवाई हुई। सड़क पर अनधिकृत रूप से वाहन खड़ा करने पर 521 चालान किए गए। वहीं बिना ड्राइविंग लाइसेंस चल रहे 880 चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। तीन सवारी बैठाकर दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ 256 चालान बने, जबकि बिना बीमा वाले 449 वाहनों पर पुलिस ने शिकंजा कसा। इसके अलावा जाति/संप्रदाय सूचक शब्द लिखने और दोषपूर्ण नंबर प्लेट लगाने वाले 113 चालान हुए। प्रेशर हार्न का प्रयोग करने पर चार चालान काटे गए। माल वाहक और छोटे यात्री वाहनों पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप लगाने की अनिवार्यता को भी सुनिश्चित कराया गया। इस श्रेणी में 86 वाहनों पर कार्रवाई की गई। संवाद
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ब्लैक स्पॉट चिह्नित
जिले के जिन स्थानों पर बार-बार सड़क हादसे हो रहे हैं। सर्वाधिक हादसों वाले 11 स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें शिकारपुर, केएमसी डिजिटल अस्पताल, रमपुरवा, परतावल बाजार, श्यामदेउवा कस्बा, कतरारी, फरेंदा कस्बा, धानी बाजार, नौतनवा कस्बा, निचलौल कस्बा और सबया शामिल हैं। इन जगहों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है।
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कोट
जिले के सभी मुख्य मार्गों पर नियमित वाहनों की जांच की जा रही है। नियम तोड़ने वालों पर चालान की कार्रवाई तो होती ही है साथ ही लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
अरुणेंद्र प्रताप सिंह, यातायात प्रभारी निरीक्षक
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जिले के टू लेन और हाईवे पर जहां घनी आबादी वाले इलाके हैं वहां संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, जेब्रा क्रॉसिंग और रोड मार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इन्हें जल्द ही सुनिश्चित कराया जाएगा ताकि सड़क सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
राजकुमार मिश्रा, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग
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सड़क सुरक्षा अभियान के तहत परिवहन विभाग भी लगातार सक्रिय है। जिले के प्रमुख मार्गों पर फरेंदा बाईपास, कतरारी, श्यामदेउरवा, पनियरा, नौतनवा, धानी, निचलौल समेत विभिन्न मार्गों पर वाहनों की जांच की जा रही है। पिछले माह कुल 365 वाहनों का चालान किया गया है, वहीं 22 ओवरलोड वाहनों को सीज भी किया गया।
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मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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