फरेंदा के तहसील को 18 घंटा बिजली सप्लाई देने की मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
उपकेंद्र से बिजली सप्लाई शुरू होने के 18 दिन के भीतर ही उपकेंद्र का ब्रेकर ध्वस्त हो गया जिससे कस्बे के लोगों को ग्रामीण स्तर की बिजली से वंचित होना पड़ा है।
फरेंदा कस्बे को बिजली आपूर्ति 18 घंटा देने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 33/11 केबी तहसील स्तरीय विद्युत उपकेंद्र लागत तीन करोड़ 57 लाख की योजना का शिलान्यास 25 जुलाई 2013 में शुरू हुुआ, जो काफी विवाद के बाद करीब डेढ़ वर्ष के इंतजार के बाद उपकेंद्र बनकर तैयार हुआ। उपकेंद्र बनने के बाद लोगों में खुशी हुई कि अब बिजली कटौती से निजात मिलेगी।
उपकेंद्र से तहसील को बिजली सप्लाई 27 मार्च से शुरू हो गई। लेकिन सामान क ीखरीद व लगने वाले पार्ट में भ्रष्टाचार व कमीशन के कारण दोयम दर्जे का सामान लगाया गया था जिसका नतीजा था कि 18 दिन के भीतर ही एजेंसी द्वारा लगाया गया ब्रेकर ध्वस्त हो गया जिससे फरेंदा कस्बे के लोगों को 18 घंटे बिजली मिलने का सपना चूर-चूर हो गया। वर्तमान समय में तहसील को महज 5 से 6 घंटे की बिजली आपूर्ति मिल रही है।
जबकि तहसील स्तरीय उपकें द्र में 16 घंटे की सप्लाई दी जा रही है। लेकिन ब्रेकर ध्वस्त होने के कारण लोगों को ग्रामीण स्तर की बिजली मिल रही है। इस उमस व तपनभरी गर्मी में कस्बे के लोगों को भयंकर बिजली कटौती की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
इस संबंध में अवर अभियंता पीएन कश्यप का कहना है कि ब्रेकर खराब हो जाने के कारण आपूर्ति बाधित हो गई। एजेंसी को पत्र भेजा गया है। सामान बदलने के बाद ही आपूर्ति बहाल हो पाएगी।