पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण बदला मौसम का मिजाज
महराजगंज। जिले में इस समय गेहूं की कटाई-मड़ाई का काम तेजी से चल रहा था। पिछले तीन दिनों से मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान जल्द अपनी खड़ी फसल को काटकर अनाज सुरक्षित करना चाहते हैं लेकिन पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश हो रही है। इसका असर तराई क्षेत्र में पड़ रहा है।
बुधवार को पूरे दिन बूंदाबांदी होने के कारण हुई। इसके चलते कटाई का काम भी प्रभावित हो रहा है। पिछले साल अप्रैल माह में गर्मी पड़ने लगी थी लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में नमी बनी हुई है। मंगलवार की देर रात से ही मौसम का मिजाज अचानक बदल गया था। पूरे दिन धूप निकली थी। रात में तेज आंधी चलने लगी। जबकि बुधवार को पूरे दिन बादल छाए रहे। हल्की बूंदाबांदी भी हुई। इसके चलते गेहूं के खेतों में नमी आ गई है। तीन दिन पहले किसान तेजी से गेहूं की फसल की कटाई-मड़ाई कर रहे थे वह काम सुस्त हो गया है। कुछ किसानों ने खेतों में ही अपनी फसल काटकर छोड़ दिया है।
शिकारपुर प्रतिनिधि के अनुसार,
धनपत मोदनवाल और भिसवा निवासी रामनेवारे गुप्ता ने बताया कि बुधवार को हल्की बारिश से गेहूं की कटाई बंद हो गई है। बारिश की वजह से फसल में नमी आने के कारण काफी परेशानी हो रही है। अब कटाई का काम आगे बढ़ जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी, शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 1.45 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई है। अधिकतर किसानों ने फसल की कटाई कर ली है। कुछ किसानों की अभी कटाई-मड़ाई बाकी है।
चक्रवाती परिसंचरण का प्रभाव, सामान्य से अधिक बारिश
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बारिश अप्रैल में होने की संभावना है। पिछले वर्ष जनपद में अप्रैल में बारिश 2025 में 8.05 एमएम रही। इस बार अभी तक 9.03 एमएम बारिश हो चुकी है। बुधवार सुबह 08 बजे से बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे के बीच महराजगंज में सर्वाधिक बारिश निचलौल में 4.01 एमएम रिकॉर्ड किया गया। अभी आगे भी इस माह बारिश की स्थिति बन रही है। सामान्य से अधिक बारिश के पीछे चक्रवाती परिसंचरण व विक्षोभ की अधिकता कारण है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से ऐसा हो रहा है। 12 अप्रैल के बाद 30 किमी प्रति घंटा तेज हवाओं का दौर शुरू हो सकता है।
वर्जन
बूंदाबांदी से गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचेगा। अभी कई किसानों की फसल खेतों में पड़ी है। अगर मौसम नहीं सुधरा हो पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी।
-रामकमल गुप्ता, डगरुपुर
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बेमौसम बारिश से चिंता बढ़ गई है। धान के फसल के समय भी बारिश से काफी नुकसान हुआ था। अब गेहूं की फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
-केसई मौर्य, भगतपुरवां