धनेवा स्थित स्टेडियम में प्रैक्टिस करते खिलाड़ी।
महराजगंज। कृषि बाहुल्य जनपद में नई उम्र की क्रिकेट पौध उच्च शिखर की तरफ अग्रसर है। अंडर 14 में जिले के खिलाड़ी नाम बनाने में खूब पसीना बहा रहे हैं। इसका परिणाम भी सामने आ रहा है। यह खिलाड़ी आम घरों से हैं। किसी खिलाड़ी के घर का खर्च दूध बिक्री से चलता तो कोई सब्जी बिक्री की कमाई के जरिये अपनी प्रतिभा को धार दे रहे हैं।
विषम परिस्थितियों से जूझने का जज्बा ही नन्हें खिलाड़ियों को सचिन व विराट बनने की तरफ अग्रसर कर रहा है। बीते माह जनपदीय अंडर 14 क्रिकेट खिलाड़ियों ने गोरखपुर जैसे अग्रणी जिले को पटखनी देकर मंडलीय लीग पर कब्जा जमाया था। जिले की टीम कानपुर में हुए जोन लीग से पराजित लौट आई है लेकिन खिलाड़ियों का जोश बता रहा है कि यहां तक का सफर पूरा किया है तो अगले अंडर 14 का राज्य स्तरीय लीग फतह करके ही मानेंगे। यही नहीं अंडर 14 से एक खिलाड़ी का चयन एनपीएल (नेपाल प्रीमियर लीग) में तो दूसरे का जेपीएल (झारखंड प्रीमियर लीग) में हुआ है।
जिले की आबोहवा सिर्फ अन्न उत्पादन के लिए ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों की नई पौध के लिए भी अनुकूल साबित हो रही है। बीते वर्षों में बेसिक, माध्यमिक स्कूल स्तरीय स्पर्धा में विद्यार्थियों ने एथलीट, कुश्ती, हॉकी व कबड्डी जैसे खेल में यह साबित किया। लेकिन एक और खेल है जिसे देश का सबसे पसंदीदा खेल तो माना जाता है लेकिन इसके लिए बेसिक, माध्यमिक की कौन कहे स्टेडियम में भी कोच नहीं हैं। फिर भी क्रिकेट के अंडर 14 में खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। अंडर 14 का मंडल स्तरीय लीग 28 से 30 दिसम्बर 2025 गोरखपुर में जीत दर्ज की।
यह अगर संभव होता दिख रहा तो इसमें बीएमटी की मेहनत को किनारे नहीं कर सकते। महज पांच वर्षों की मेहनत पर यह परिणाम अपने आप में अलग छाप छोड़ता दिख रहा। कोच अतुल मणि त्रिपाठी नये पौध के जौहरी बनकर उभरे हैं जो निम्न आय वर्ग वाले परिवार के बच्चों को बड़ा ख्वाब दिखाकर मंजिल की तरफ बढ़ने की प्रेरणा देने में अग्रणी बने हैं।