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भ्रष्टाचार : खडंजा निर्माण के लिए हार्डवेयर की दुकान से खरीदी ईंट

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पिपरा नरायन, कुईया कंचनपुर और रजवल गांव में अनियमितता सामने आई
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महराजगंज। क्षेत्र के पिपरा नरायन, कुईया कंचनपुर और रजवल गांव में विकास कार्याें के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का मामला सामने आया हैै। डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन गांवों में खड़ंजा बनाने के लिए खरीदी गई ईंट की रकम का भुगतान हार्डवेयर की दुकान पर किया गया है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि खड़ंजा निर्माण हुआ ही नहीं है। इस मामले में बीते दिनों तीनों गांवों के प्रधानों और तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया था। इनके जवाब मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।


डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक पिपरा नरायन, कुइंया कंचनपुर और रजवल गांवों में विकास कार्यों में गंभीर अनियमितता पाई गई है। प्राथमिक जांच में ही ईंट खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई है। राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि के उपयोग में नियमों की अनदेखी की गई। जांच में सामने आया कि संबंधित ग्राम पंचायतों में ईंटों की आपूर्ति सीधे भट्ठों से न कराकर हार्डवेयर और निर्माण सामग्री की दुकानों के माध्यम से भुगतान दर्शाया गया।
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इस संबंध में कुइंया कंचनपुर के ग्राम प्रधान गिरिजेश गुप्ता और पिपरा नरायन के ग्राम प्रधान सत्येंद्र कुमार का कहना है कि सभी कार्य नियमों के अनुसार कराए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि उचित जवाब तैयार कर विभाग को भेज दिया जाएगा। उनका आरोप है कि चुनाव नजदीक आने के कारण विरोधियों द्वारा साजिश के तहत उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।


निर्माण कार्यों में छह लाख से अधिक की वित्तीय अनियमितता उजागर, ग्राम प्रधान व सचिव से होगी रिकवरी

विकास खंड लक्ष्मीपुर के ग्राम पंचायत सिसवनिया विशुन का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी

महराजगंज। विकास खंड लक्ष्मीपुर के ग्राम पंचायत सिसवनिया विशुन में कराए गए विकास कार्यों में 6 लाख 37 हजार 254 रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। प्राथमिक जांच में धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन सख्त रुख अपनाते हुए ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से रिकवरी की तैयारी में है।


यह मामला कुछ ग्रामीणों की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ताओं ने 46 बिंदुओं पर जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि चकमार्गों और चकबंधों पर मिट्टी कार्य के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है, जबकि धरातल पर कार्य मानकों के अनुरूप नहीं है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने जांच के आदेश दिए और परियोजना निदेशक को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। जांच के दौरान सभी 46 बिंदुओं पर भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें कई स्थानों पर कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब और कहीं-कहीं कार्य अधूरा पाया गया।
जांच में राजेन्द्र के खेत से सोनवल सिवान तक, सुरेश के खेत से बेलवा जंगल तक, बृजलाल के खेत से मदरहना सिवान तक तथा मिश्री के घर से थरौली सिवान तक कराए गए मिट्टी कार्यों में गंभीर खामियां पाई गईं। अभिलेखों में कार्य पूर्ण दर्शाया गया था, जबकि मौके पर वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत मिली।
परियोजना निदेशक की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और कार्यों की गुणवत्ता की अनदेखी की गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य विकास अधिकारी की संस्तुति पर जिलाधिकारी ने 3 दिसंबर को ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। दोनों का जवाब जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय में प्राप्त हो चुका है।
डीपीआरओ के अनुसार प्राप्त स्पष्टीकरण और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में अनियमितता किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्रेया मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी
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