बाढ़ के खतरों से निपटने में जुटे
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महराजगंज। जिले में बाढ़ से होने वाली तबाही को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। वर्ष 2017 में आई बाढ़ से सबक लेते हुए बचाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। बंधों की स्थिति, रेनकट, रैट होल, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं समेत अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। संबंधित विभागों के अधिकारियों को जरूरी कार्यों को पूरा कराने के लिए दिशानिर्देश भी दिए जा चुके हैं। जिला प्रशासन की ओर से कार्यों का पर्यवेक्षण भी शुरू कर दिया गया है। वहीं अधिकारियों को चेतावनी भी दी गई है कि कार्य में लापरवाही होने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
इस वर्ष बाढ़ के खतरों को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को बंधों की स्थिति की रिपोर्ट देने के साथ ही उसे ठीक कराने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा डीएम ने बाढ़ शरणालय, शौचालय, विद्युत व्यवस्था, बाढ़ शरणालाय तक पहुंचने के रास्ते, बाढ़ चौकियों की स्थिति, पेयजल, राहत सामग्री रखने के स्थान, पशुओं के लिए चारा आदि का प्रबंध करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया है। इस बीच बाढ़ के खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 35 बाढ़ चौकियां बना भी ली गई हैं। जहां समय आने पर जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। उधर, बंधों की स्थिति खस्ताहाल है। कहा जा रहा है कि कहीं रेन कट तो कहीं रैट होल इस बार बाढ़ के दौरान तबाही मचा सकते हैं। समय रहते अधिकारियों ने मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया तो दिक्कत हो सकती है। जिले से होकर जाने वाली नदियों में राप्ती, गंडक, छोटी गंडक, रोहिन, चंदन प्यास, घोघी आदि शामिल हैं। इनमें से राप्ती नदी 10.60 किमी, गंडक नदी 15 किमी, छोटी गंडक 3.80 किमी, रोहिन 75 किमी, चंदन प्यास 16 किमी, घोघी नदी का जिले में 56 किमी दायरा है। इन्हीं नदियों में पानी बढ़ने से तटबंध टूटता है और तबाही मचती है। विभागीय अधिकारियों को बाढ़ के खतरों को देखते हुए सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर तैयारी पूरी करने के निर्देश हैं। अपर जिलाधिकारी कुंज बिहारी अग्रवाल ने बताया कि बाढ़ पूर्व बचाव की तैयारी तेज कर दी गई है। संबंधित अधिकारियों को तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। बाढ़ के दौरान कोई परेशानी न हो, इसका खास ख्याल रखा जाएगा। बाढ़ पूर्व तैयारी में अगर कहीं भी लापरवाही मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।