सोनौली। सीमा से सटे सभी भारतीय सीमावर्ती कस्टम चेकपोस्ट पर बिना एमआरपी वाले आयतीय सामान को नेपाल भंसार विभाग ने रोक लगा दी है। मंगलवार को लागू किए गए इस नए नियम की वजह से दोनों देशों के व्यापारियों को परेशानी हो रही है। भारत के कईव्यापारियों के माल तीन दिनों से डंप पड़े हैं।
साथ ही इसकी वजह से सीमा पर भैरहवा भंसार कार्यालय में करीब 200 और बीरगंज में 600 ट्रक रुके हुए हैं। इसके अलावा साथ ही बढ़नी, रुपईडीहा, बिराटनगर सहित कुल एक हजार से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं।
नेपाल के व्यापारियों का कहना है कि यह नया नियम लागू करना नामुमकिन है। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियां नेपाल के लिए एमआरपी तय नहीं करतीं और कस्टम पर लाने के बाद लेबलिंग नहीं हो सकती। व्यापारियों का यह भी कहना है कि सरकार ने बिना तैयारी के नए नियम को लागू कर दिया है। इससे संकट पैदा हो गया है। नेपाल सरकार ने मंगलवार से विदेश से इंपोर्ट होने वाले तैयार सामान पर एमआरपी लेबलिंग को अनिवार्य कर दिया है। बिना एमआरपी वाले सामान का कस्टम इंस्पेक्शन रोक दिया गया है। इस वजह से सीमा पर वाहनों की लंबी कतार लग गई है।
एमआरपी की अनिवार्यता लागू होने की वजह से हजारों कंटेनर भंसार चेकपोस्ट पर रोके गए हैं और व्यापारी तैयारी की कमी और प्रैक्टिकल दिक्कतों की वजह से विरोध कर रहे हैं। वाणिज्य विभाग ने कहा है कि एमआरपी नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा और सभी आयातकों को कानून मानना होगा। जबकि व्यापारियों की मांग है कि वेयरहाउस में लेबलिंग की इजाजत दी जाए। इसके बाद बृहस्पतिवार को जो वाहन सामान लेकर नेपाल में पहुंचे उन्हें लेबलिंग कर पास करने की अनुमति विभाग ने दी है। वाणिज्य विभाग ने एक नोटिस जारी करके 28 अप्रैल से देश में बने और इंपोर्ट हुए रेडीमेड सामान के लिए एमआरपी लेबल जरूरी करने के इंतजाम की जानकारी दी थी।
भैरहवा भंसार कार्यालय के चीफ कस्टम ऑफिसर हरिहर पौडेल ने बताया कि सिर्फ उन्हीं सामानों का इंस्पेक्शन किया जा रहा है जो नियमों के मुताबिक पहुंच चुके हैं। जिन सामानों पर एमआरपी नहीं लिखा है उनका इंस्पेक्शन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया है कि
मंगलवार से बिना एमआरपी वाले किसी भी सामान का कस्टम क्लियरेंस नहीं हुआ है।
कंज्यूमर एक्ट के तहत लेबल पर दी जानी है जानकारी : भैरहवा भंसार एजेंट संघ के कोषाध्यक्ष प्रकास पौडेल ने बताया कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2075 की सेक्शन 6, सब-सेक्शन 3 में यह तय किया गया है कि मैन्युफैक्चर को नेपाल में बने सामान के लिए नेपाली या इंग्लिश में एमआरपी लिखना होगा और इम्पोर्टर को विदेश से इम्पोर्ट किए गए सामान के लिए नेपाली या इंग्लिश में एमआरपी लिखना होगा। जिन सामानों की कीमतें लेबल पर साफ-साफ इस तरह से नहीं लिखी होतीं कि आम लोग उन्हें आसानी से समझ सकें, उन्हें मार्केट में बेचा या बांटा नहीं जा सकता। एक नियम यह है कि कीमत तय करते समय सामान पर लगे सभी टैक्स को मिलाकर एमआरपी तय की जानी चाहिए। कीमत के अलावा, सामान के लेबल पर दूसरी जरूरी डिटेल्स बताना भी उतना ही जरूरी है। इसमें सामान का वज़न या क्वांटिटी, प्रोडक्शन डेट, बैच नंबर, बेस्ट बिफोर डेट, और इस्तेमाल के दौरान होने वाले पॉसिबल नेगेटिव साइड इफेक्ट्स (साइड इफेक्ट्स) के बारे में साफ-साफ जानकारी होनी चाहिए।
बिना एमआरपी वाले उत्पादों के लिए नई व्यवस्था लागू: नेपाल सीमा पर स्थित बढ़नी-कृष्णानगर बॉर्डर पर इन दिनों घरेलू सामान ले जाने वाले आम नागरिकों को बड़ी राहत दी जा रही है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे खाने-पीने के सामान और दो-चार जोड़ी कपड़ों की आवाजाही पर कस्टम विभाग ने मानवीय आधार पर नरमी बरती है। स्थानीय निवासी अजय कुमार, अनीस अहमद और खालिद ने बताया कि व्यक्तिगत जरूरतों के लिए खरीदे गए सामानों पर अब अनावश्यक रोक-टोक नहीं हो रही है। इसी के साथ भंसार विभाग ने बिना एमआरपी वाले सामानों को लेकर चल रहे विवाद का भी स्थाई समाधान निकाल लिया है। अब ऐसे सामानों को सीमा पार ले जाने के लिए लिखित में यह घोषणा करनी होगी कि सामान कितने में खरीदा गया है और नेपाल में उसे किस मूल्य पर बेचा जाएगा। नियमों के मुताबिक, बिना मूल्य अंकित किए नेपाल में सामान बेचने पर पाबंदी रहेगी। वहीं, शादी-विवाह के सीजन को देखते हुए प्रशासन ने फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन और एसी जैसे भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर भी विशेष रियायत दी है।
शादी का निमंत्रण पत्र (कार्ड) दिखाने पर इन सामानों का भंसार कॉमर्शियल रेट के बजाय काफी कम दरों पर किया जा रहा है।
सरकार का तर्क उपभोक्ताओं को सस्ता मिले सामान
नेपाल सरकार ने कस्टमर्स को फ्रॉड से बचाने और मार्केट प्राइस को कंट्रोल करने के लिए कस्टम पॉइंट पर एमआरपी और लेबलिंग को जरूरी बनाने की एक पॉजिटिव पॉलिसी अपनाई है। हालांकि व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि तैयारी और पारदर्शी प्रक्रिया का अभाव है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को मिलने वाले समान के बीच अत्यधिक अंतर नहीं हो और लोगों को सस्ता समान मिले। नेपाल ओवरसीज एक्सपोर्ट इंपोर्ट एसोसिएशन ने इस स्थिति पर एतराज जताया है। महासचिव जयंत अग्रवाल का कहना है कि नियमों को बिना तैयारी और बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के बेतरतीब ढंग से लागू किया गया। इससे सामान कस्टम में फंस गया है और व्यापारी घबरा गए हैं।
विदेशी कंपनियां नेपाल के लिए अलग पैकेजिंग नहीं करतीं
नेपाल ओवरसीज एक्सपोर्ट इंपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव जयंत अग्रवाल ने कहा कि सरकार यह असलियत नहीं समझी है कि विदेशी कंपनियां नेपाल के लिए एमआरपी और लेबल के साथ अलग पैकेजिंग नहीं करतीं क्योंकि नेपाल की इकॉनमी छोटी है। उन्होंने कहा, ‘कोई भी विदेशी कंपनी हमारे छोटे मार्केट के लिए सामान पर लेबल नहीं लगाती, सामान डॉलर और यूरो में आता है और जब तक वे कस्टम तक पहुंचते हैं, तब तक उनकी कीमतों में बहुत बड़ा अंतर होता है।’ हमारी मांग है, सबसे पहले सामान को क्लासिफ़ाई किया जाना चाहिए ताकि यह तय हो सके कि कौन सा सामान एमआरपी के तहत आ सकता है और कौन सा नहीं। उन्होंने कहा कि जब सामान ट्रेडर के वेयरहाउस में पहुंचे, कस्टम पॉइंट पर नहीं तो एमआरपी और लेबलिंग बिक्री के पहले पॉइंट पर की जानी चाहिए।
आठ साल से सोई सरकार, अचानक जागी
भैरहवा सिद्धार्थ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का कहना है कि जब सरकार अचानक जागी और बिना किसी तैयारी और ट्रेनिंग के सालों से ठंडे बस्ते में पड़े कानून को लागू करने की कोशिश की, तो एक गंभीर संकट पैदा हो गया है। एसोसिएशन की अध्यक्ष नेत्र आचार्य ने कहा कि न सिर्फ इंपोर्टर्स बल्कि कस्टम एजेंट्स ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं क्योंकि वे इस गलत नियम के अंदर काम नहीं कर सकते, इसलिए कल से कस्टम क्लियरेंस का काम पूरी तरह से रुक गया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह 8 साल तक कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2075 के नियमों को नज़रअंदाज़ कर रही है और अब इसे बेतरतीब ढंग से लागू कर रही है, जिससे अफ़रा-तफ़री मची हुई है। समय मिलना चाहिए।
सीमा पर कस्टम में नरमी
नेपाल सरकार के पुराने वर्ष 1991 के राजस्व आदेश के तहत एक सौ रुपये भारतीय से अधिक मूल्य के सामानों पर पांच प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक कस्टम शुल्क लगाने का प्रावधान है। हालांकि, वर्तमान में जनता के रुख को देखते हुए सीमा पर इस नियम में मौखिक रूप से कुछ हद तक ढील दी गई है। इसका असर यह है कि अब दैनिक जरूरत के सामान नेपाली नागरिक भारतीय सीमा क्षेत्र के बाजारों से खरीदकर आसानी से अपने देश ले जा रहे हैं। सीमा पर तैनात सशस्त्र प्रहरी बल (एपीएफ) के जवान चेकिंग के बाद आम लोगों को आवश्यक वस्तुओं के साथ आने-जाने में अधिक बाधा नहीं दे रहे हैं।