कोडीन युक्त सीरप की खरीद-बिक्री से जुड़े सभी अभिलेख खंगाले जा रहे
नेपाल के कई युवा कोडीन युक्त सिरप के सेवन के लिए आते हैं बार्डर पार
महराजगंज। बॉर्डर इलाके में नशीली दवाओं की तस्करी धड़ल्ले से होती है। समय-समय पर बरामद की भी हुई है। कोडीन युक्त सिरप का मामला गरमाने के बाद अब उसके तार महराजगंज से भी जुड़ रहे हैं। कोडीन युक्त सिरप मंगाकर मोटा मुनाफा कमाने वाले धंधेबाजों की कुंडली खंगाली जा रही है। बॉर्डर से सटा इलाका होने के कारण क्षेत्र में कोडीनयुक्त खपत की आशंका अधिक है। कोडीन अफीम के पौधे में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पदार्थ है, इसे आसवन विधि से निकाला जाता है।
कई जिलों में कोडीन सिरप की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद शासन ने पूरे प्रदेश में सख्ती के आदेश दिए हैं। सूत्रों की मानें तो शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कई मेडिकल स्टोरों से कोडीन युक्त सिरप और नारकोटिक्स की दवाएं बेची जा रही हैं। सरकार इस पर रोक लगाने के लिए अभियान चला रही है। कई फर्मों की ओर से कोडीन सिरप को सामान्य कफ सिरप की आड़ में बेचा जा रहा है। कोडीन युक्त सिरप की खरीद-बिक्री से जुड़े सभी अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर, जीएसटी रिटर्न से लेकर कंप्यूटराइज्ड रिकॉर्ड तक की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
जिले में कफ सिरप की बिक्री बढ़ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में खपत ज्यादा हो रही है। जानकारों का कहना है कि खांसी के मरीजों से ज्यादा कफ सिरप का सेवन नशेड़ी कर रहे हैं। इन दिनों प्रत्येक माह करीब एक करोड़ का धंधा हो गया है। सिसवा, निचलौल, रेगहिया, ठूठीबारी, बरगदवा, झुलनीपुर समेत अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में खपत ज्यादा हो रही है। औषधी निरीक्षक जांच-पड़ताल में जुटे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि नेपाली युवा नशे की सस्ती डोज लेने के लिए सरहद पार आसानी से आ जाते हैं और दुकानों से कोडीनयुक्त कफ सिरप की दो से तीन शीशी एक बार में ही गटक कर चले जाते हैं। धंधेबाज ज्यादातर गैर लाइसेंसी हैं। वे कोडीनयुक्त कफ सिरप सुरक्षित स्थानों पर रखते हैं। मांग के अनुसार इसे मुहैया कराते हैं। 100 एमएल की कोडीन युक्त एक कफ सिरप 140 से 160 रुपये के बीच मिलती है। खांसी के सामान्य सिरप में अल्प मात्रा में एल्कोहल या कोडीन होता है। सिरप की एक शीशी पर करीब 15 से 20 रुपये तक मुनाफा होने से मेडिकल स्टोर पर प्रचुर मात्रा में कफ सिरप उपलब्ध है। कोडीन युक्त कफ सीरप की बिक्री का रिकाॅर्ड रखना अनिवार्य है, लेकिन ऐसा बहुत कम हो रहा है। बाजार में अधिकतर कफ सिरप ऐसे बिक रहे हैं, जिन पर कोडीन का जिक्र ही नहीं है।
सूत्रों की मानें तो सिसवा, निचलौल, नौतनवा, महराजगंज में कोडीनयुक्त सिरप बाहर से मंगाकर धंधेबाजों ने मोटी रकम बनाई है। इन क्षेत्रों में जांच करने की योजना बनाई गई है। खास बात यह है कि धंधेबाजों ने अपने बचाव की व्यवस्था भी बना ली है। आपूर्ति कोडीनयुक्त सिरप के नाम नहीं किसी और दवा के नाम की जाती है। इससे सीधे तौर पर पकड़ में आने की आशंका कम रहती है। स्टाक का सत्यापन करने पर इनकी कलई खुल सकती है।
तीन साल पहले पकड़ी गई थीं करीब 700 करोड़ की दवाएं
सूत्रों की माने तो दवाओं के बड़े पैमाने पर कोडीनयुक्त कफ सीरप का भी खेल चल रहा है। इस साल्ट वाली कफ सीरप को बच्चों के लिए खतरनाक बताया गया है। इसमें अफीम का प्रयोग होता है, इसलिए इसका प्रयोग लोग नशे के लिए करते हैं। बताया जाता है कि बिहार और नेपाल के सीमावर्ती इलाके में बड़े पैमाने पर कोडीन युक्त सिरप का उपयोग किया जा रहा है। बिहार में शराबबंदी के चलते भी इसका प्रगोग बढ़ा है। इसे पीने वालों के मुंह से शराब की दुर्गंध नहीं आती, इसलिए भी इसकी मांग अधिक है। नेपाल सीमा क्षेत्र में इसकी खपत अधिक है। तीन साल साल पहले महराजगंज में करीब 700 करोड़ की जो दवाएं पकड़ी गई थीं, उनमें इसी प्रकार के सिरप और टेबलेट थे।
वर्जन
शासन से निर्देश मुताबिक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच गंभीरता से करने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- पूरन चंद, डीएलए, गोरखपुर