महराजगंज। अस्पतालों में अब हर नवजात शिशु की “बाल आभा आईडी” बनाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। यह व्यवस्था संस्थागत प्रसव (अस्पताल में होने वाले प्रसव) के बाद तुरंत लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य जन्म से ही बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित करना है ताकि उन्हें भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं सहजता से उपलब्ध कराई जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाल आभा आईडी केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन योजना के तहत तैयार की जा रही है। योजना के तहत हर नागरिक को एक विशिष्ट डिजिटल हेल्थ आईडी प्रदान की जाती है जिसमें उसकी पूरी चिकित्सा जानकारी सुरक्षित रहती है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिला अस्पताल समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर संस्थागत प्रसव के दौरान यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है। संबंधित अस्पतालों के डाटा एंट्री ऑपरेटरों को यू-विन पोर्टल पर बाल आभा आईडी जनरेट करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जन्म के तुरंत बाद बच्चे का नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, वजन, टीकाकरण विवरण आदि पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। आभा आईडी पर बच्चे को मिलने वाले सभी टीके, जांच और उपचार की जानकारी अपडेट होती रहेगी।
नवजात शिशुओं की बाल आभा आईडी बनने से उनके स्वास्थ्य प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी। पहले कई बार जन्म के बाद टीकाकरण या चिकित्सा संबंधी जानकारी अलग-अलग रजिस्टरों में दर्ज की जाती थी अब यह सारी जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी।
- डॉ. नीरज कुमार कन्नौजिया, डिप्टी सीएमओ