महराजगंज। चैत्र नवरात्र की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी, जिसका समापन नवमी के दिन किया जाएगा। यह नौ दिन मुख्य रूप से देवी के नौ रूपों की पूजा को समर्पित है।
चैत्र नवरात्र इस वर्ष 30 मार्च से रेवती नक्षत्र और ऐन्द्र योग में प्रारंभ होगी। हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। मां पीतांबरा जनकल्याण ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषी आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष रविवार को नवरात्र प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा हाथी पर विराजमान होकर आएंगी जो समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है।
चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा और व्रत किए जाते हैं। चैत्री शुक्ल विजयादशमी को सोमवार दिन होने से माता की विदाई महिष (भैंसे) पर होगी। नवरात्रि के प्रथम दिन 30 मार्च को कलश स्थापना सूर्योदय से आरंभ कर मध्याह्न 2.14 बजे तक कर लें। अभिजीत मुहूर्त (मध्याह्न) 11.24 से 12.36 बजे तक कलश स्थापना करनी चाहिए। यह शुभ फलदायक होगा।
इस बार चैत्र नवरात्र पंचमी तिथि का लोप होने के कारण 8 दिन की ही होगी। इस बार महाष्टमी व्रत 5 अप्रैल तथा नवमी 6 अप्रैल को माना जाएगा। उन्होंने बताया कि 30 मार्च को कालयुक्त’ नामक नवसंवत्सर प्रारंभ हो रहा है। जिस दिन सम्वत्सर प्रारंभ होता है वही वर्ष का राजा होता है। अतः इस वर्ष सूर्य राजा हैं मंत्री भी सूर्य हैं और धनेश बुध हैं।