गांव के करीब अस्पताल में ही मिलेगी नवजात शिशुओं काे इलाज
सात सीएचसी में एनबीएसयू चालू, पांच जल्द शुरू होगा
महराजगंज। अब ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में जन्म ले रहे नवजातों को गंभीर बीमारी की स्थित में जिला अस्पताल तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उन्हें सीएचसी पर ही जरूरी इलाज व चिकित्सकीय सुविधाएं मिलेंगी।
जानकारी के अनुसार, जन्म लेने वाले गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए जिले के हरेक ब्लॉक पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चार-चार बेड का एनबीएसयू यानी न्यूबोर्न स्टैबिलाइजेशन यूनिट (नवजात स्थिरीकरण इकाई) को तैयार किया जा रहा है। एनबीएसयू सात सीएचसी पर चल रहा है और पांच ब्लॉक पर बने सीएचसी पर तैयार किया जा रहा है। सितंबर से इनका संचालन भी शुरू होने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सीएचसी निचलौल में 10 बेड का तो फरेंदा, परतावल, लक्ष्मीपुर, मिठौरा, बृजमनगंज, सदर ब्लाक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चार-चार बेड का संचालन शुरू कर दिया गया है। वहीं सीएचसी घुघली, रतनपुर, धानी, पनियरा, सिसवां में जरूरी उपकरण पहुंच चुके हैं। यहां सिंतबर में उपकरणों को स्थापित कराकर एनबीएसयू को शुरू करा दिया जाएगा।
अभी जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती हैं 31 मरीज
जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में इस समय 31 बच्चों को भर्ती किया गया है। इस वार्ड में प्रतिदिन 10 से 12 नवजात सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। वहीं जिला अस्पताल के एनबीएसयू में एक भी नवजात भर्ती नहीं है। ये स्थिति इसलिए है क्योंकि सात सीएचसी पर बने एनबीएसयू पर नवजातों का इलाज शुरू हो चुका है। लेकिन सर्दियों में सदर का एनबीएसयू नवजातों के इलाज को तब काम आएगा जबकि बीमार नवजातों की संख्या बढ़ेगी और एसएनसीयू में बेड फुल रहेगा।
गंभीर मरीजों की स्थिति को स्थिर करने के लिए होता है एनबीएसयू
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा बताते हैं कि एनबीएसयू में कम वजन वाले, समय से पहले (प्रीमेच्योर) जन्मे या मामूली रूप से बीमार नवजात शिशुओं (0 से 28 दिन तक) का इलाज करते हुए उन्हें स्थिर किया जाता है। यहां पर मामूली बीमार और कमजोर नवजात, कम वजन वाले शिशु, प्रीमेच्योर शिशु, पीलिया, जन्म लेते ही सांस लेने में हल्की तकलीफ, हाइपोथर्मिया, जन्म लेने पर दूध न पीने की समस्या से ग्रसित नवजातों का इलाज किया जाएगा। यहां पर ऐसे बच्चे होंगे जिन्हें नीकू (एनआईसीयू) या पीकू (पीआईसीयू) वार्ड में भर्ती करने की जरूरत नहीं होगी।
वर्जन
एनबीएसयू से हाइपोथर्मिया, पीलिया, लो बर्थ बेबी, प्री मेच्योर बेबी, बर्थ एस्फिसिया जैसे बच्चों का इलाज करते हुए उनकी तबीयत को स्थिर किया जाएगा। यहां पर कंगारू केयर यूनिट भी होगी। सात अस्पताल में ये सुविधा शुरू कर दी गई तो वहीं पांच अन्य अस्पतालों में जल्द ही एनबीएसयू शुरू करा दिया जाएगा।
-डॉ. राजेश द्विवेदी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी महराजगंज