एसडीआरएफ और एसएसबी की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद नहर से निकाला शव
शरीर पर कपड़े नहीं मिलने से हादसे के कारणों पर उठे सवाल
मिठौरा। सिंदुरिया थाना क्षेत्र के जगदौर गांव के रितेश विश्वकर्मा (11) का शव मंगलवार की शाम करीब 5:30 बजे मोतीपुर नहर पुल के पास मिला। रविवार शाम बड़ी नहर में डूबे मासूम को एसडीआरएफ, एसएसबी, पुलिस और स्थानीय गोताखोर पूरी रात ढूंढ़ते रहे। मंगलवार की शाम तेज बहाव के बीच शव पानी की सतह पर दिखाई दिया। एसएसबी की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला।
रविवार शाम सेमरा ढाला के सामने बड़ी नहर के पास रितेश के डूबने की सूचना पर पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कराया था। पूरी रात एसडीआरएफ और एसएसबी की टीम नहर के किनारे-किनारे तलाश करती रही लेकिन सफलता नहीं मिली। सोमवार की शाम खोज टीम मोतीपुर नहर पुल के पास पहुंची, जहां पानी की लहरों के बीच अचानक शव ऊपर आ गया। इसके बाद जवानों ने काफी प्रयास कर शव को बाहर निकाला।
शव मिलने के बाद मौके पर मौजूद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मां बेटे के शव से लिपटकर बिलखती रही जबकि गांव के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। इस घटना में एक नया पहलू भी सामने आया है। शव के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि बच्चा यदि केवल फिसलकर ही गिरा था तो उसके कपड़े कैसे उतर गए।
लोगों में चर्चा हो रही है कि यदि बच्चा केवल फिसलकर नहर में गिरा होता तो उसके शरीर पर कपड़े होने चाहिए थे। इसी आधार पर लोग आशंका जता रहे हैं कि संभवतः वह नहर में नहाने के दौरान गहरे पानी में चला गया होगा और डूब गया। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बचाव टीम में टीम कमांडर उप निरीक्षक सौरभ धर दुबे, दीपक मौर्या, बृजमोहन सहित एसएसबी और एसडीआरएफ की टीम लगी रही। थाना प्रभारी सिंदुरिया विशाल शुक्ला ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों पर कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा।
बेटे के शव से लिपटकर रोटी रही मां
मोतीपुर पुल के पास जैसे ही 11 वर्षीय रितेश का शव नहर से बाहर निकाला गया, उसके मां की चीखें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। रविवार शाम से लापता बेटे की तलाश में मां हर आने-जाने वाले से एक ही सवाल पूछ रही थी मेरा बेटा मिल जाएगा न? मां बार-बार शव से लिपटकर यही कहती रही उठ जा बेटा... घर चल... मैं तेरा इंतजार कर रही हूं...। गांव की महिलाएं उसे संभालने की कोशिश करती रहीं लेकिन हर बार वह बेटे को देखकर बेसुध हो जाती। वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। कई लोग खुद को रोने से नहीं रोक सके। पिता रोजी-रोटी के लिए बाहर मजदूरी करते हैं।