संवाद न्यूज़ एजेंसी
महराजगंज। जिले में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर आम किसानों की बढ़ती परेशानी को लेकर प्रशासन परेशान था। ऐसे में प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए मामले की गहनता से जांच कराई। इस दौरान यूरिया खाद की कालाबाजारी करने वाले काश्तकारों की काली करतूत की पोल खुल गई। फिलहाल इस प्रकरण में रविवार को सोनौली पुलिस ने जिला कृषि अधिकारी की तहरीर पर एक ही गांव के तीन काश्तकारों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि जिले में यूरिया खाद के आवंटन के बाद बढ़ती किल्लत को देख सरहद पर खाद की तस्करी होने की आशंका हुई। मामले को गंभीरता से लेते हुए 21 अगस्त को मौके पर पहुंच कर एक मैट्रिक टन से अधिक यूरिया खाद की खरीदारी करने वाले काश्तकारों की जांच की गई।
इस दौरान पता चला कि भारत नेपाल बाॅर्डर के करीब गांव हरदीडाली निवासी इरफान की ओर से जुलाई में 10 बार में कुल 25 बोरी नीम कोटेड यूरिया की खरीदारी की गई है।
हालांकि इरफान ने लिखित बयान देकर कहा कि उनके पास दो एकड़ ही कृषि योग्य भूमि है। उक्त भूमि बटाई पर ली है। इरफान ने यह भी कहा कि उन्होंने शेष खाद 250 रुपये प्रति बोरी का लाभ लेकर दूसरे को बेच दी।
इसी तरह हरदीडाली गांव निवासी काश्तकार निजामुद्दीन की ओर से जुलाई में 17 बार में 35 बोरी नीम कोटेड यूरिया खाद की खरीदारी की गई है। हालांकि नौतनवा तहसील के राजस्व अभिलेख के मुताबिक निजामुद्दीन के पास महज 1.40 हेक्टेयर ही कृषि भूमि है। वहीं काश्तकार सरफुद्दीन ने जुलाई में 13 बार में 32 बोरी नीम कोटेड यूरिया खाद की खरीदारी की है। हालांकि सरफुद्दीन ने लिखित में बयान दिया है कि उनके पास कोई कृषि भूमि नहीं हैं।
ऐसे में आशंका है कि गांव भारत-नेपाल बार्डर के करीब होने के चलते तीनों काश्तकारों की ओर से खाद से मोटा मुनाफा कमाने के लिए नेपाल तस्करी कर दी गई है।
वहीं सोनौली थाना प्रभारी निरीक्षक अजीत प्रताप सिंह के अनुसार मामले में जिला कृषि अधिकारी की तहरीर पर आरोपी काश्तकार सरफुद्दीन, निजामुद्दीन और इरफान निवासी हरदीडाली के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।