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Maharajganj News: प्राचीन ऐतिहासिक स्थल राजधानी गांव पहुंचे पुरातत्व उत्खनन अधिकारी

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प्राचीन ऐतिहासिक स्थल राजधानी गांव पहुंचे पुरातत्व उत्खनन अधिकारी
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पुरातत्व विभाग ने 2005 में किया था उत्खनन, खुदाई में शुंग, कुषाण, मौर्य, गुप्त कालीन मिले हैं अवशेष
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क्षेत्र के सभी ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का स्थानीय निरीक्षण करने का शासन का है निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अन्वेषण और उत्खनन अनुभाग भारत सरकार के निर्देश के पर राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम ने शनिवार को लक्ष्मीपुर क्षेत्र के प्राचीन ऐतिहासिक बौद्ध स्थल राजधानी के टीले का जायजा लिया।
पुरातत्व उत्खनन अधिवेक्षण अधिकारी लखनऊ रामविनय के नेतृत्व में टीम ने स्थानीय लोगों से चर्चा की और यहां मिले पुरातत्व अवशेषों की बारीकियों से जांच पड़ताल की। रामविनय ने बताया कि क्षेत्र के सभी ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का स्थानीय निरीक्षण करने का निर्देश शासन स्तर से जारी किया गया है। इसी क्रम में राजधानी गांव के टीले का निरीक्षण किया जा रहा है। रामविनय अपनी टीम के साथ शनिवार को लक्ष्मीपुर ब्लाॅक मुख्यालय से 7 किमी दूरी पर स्थित ऐतिहासिक गांव राजधानी के प्राचीन टीले पर पहुंचे। वहां बिखरी ईंट आदि अवशेषों को बहुत ही करीब से देखे और संकलन करते हुए सभी को कैमरे में कैद किया। रामविनय ने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगा। शासन स्तर से रिपोर्ट की समीक्षा होगी। उसके बाद यहां के विकास का खाका तैयार किया जाएगा।
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वर्ष 2005 में राजधानी टीले का हुआ था उत्खनन
शासन के निर्देश पर वर्ष 2005 में विभागीय अधिकारियों की टीम ने राजधानी गांव में उत्खनन का कार्य किया था। करीब 350 मीटर के दायरे में तीन स्थानों पर उत्खनन किया गया। जिसमें मिले पुरा अवशेषों ने हैरत में डाल दिया। खुदाई में माटी के टूटे फूटे बर्तनों, हड्डिओं, मनकों एवं मृणमूर्तियों के ढेर लग गए। करीब 45 दिन चले उत्खनन में अवशेषों का जब विश्लेषण किया गया तो आज से लगभग 2800 पूर्व की संस्कृतियां (शुंग, कुषाण, मौर्य, गुप्त) के उतार चढ़ाव की कहानी बयां करती नजर आई। मिट्टी के फर्श पर बने चूल्हे और जले आनाज, बिखरी हड्डियां उनके आहार व्यवहार की कहानी कहती हैं। यहां मिले मुद्रा, मिट्टी के पहिये, शतरंज की गोटिओं, कटोरे, जग, लोटा, नायिका की मूर्ति, सिक्के, सुराही, दवात, मटके, छल्लेदार कुआं, ईंट की दीवार यह दर्शाता है कि यहां एक सुसज्जित बस्ती जरूर रही होगी।

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अवशेष सुरक्षित रखें रखे गए हैं
रामविनय पुरातत्व उत्खनन अधिवेक्षण अधिकारी रामविनय का कहना है कि यहां मिले अवशेषों से यह स्पष्ट होता है कि यहां बहुत पुरानी सभ्यता थी। जो आज भी एक गांव के रूप में है। यहां मिले पुरावशेष लखनऊ स्थित पुरातत्व विभाग कार्यालय में सुरक्षित रखी गई हैं।


युवाओं को रोजगार मिलेगा
देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति महराजगंज के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के सर्वेक्षण से यहां के विकास की आस जगी है। यहां का विकास हुआ तो पर्यटकों का आवागमन होगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा।
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बौद्ध धर्मावलंबियों का आवागमन होता
ग्राम पंचायत राजधानी के प्रधान अमन शुक्ल ने बताया कि उनका गांव अति प्राचीनतम गांव है। यहां खुदाई में मिलने वाले अवशेषों से पता चलता है कि पुरानी सभ्यता निवास करती थी। उन्होंने कहा कि गांव के ऐतिहासिक टीला का विकास हो जाता तो ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलते और पूरी दुनिया के बौद्ध धर्मावलंबियों का आवागमन होता।
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