महराजगंज। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से न सिर्फ तमाम कार्य आसान हुए हैं बल्कि गुणवत्ता और सार्थकता भी प्रमाणिक हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण सर्वे में पहली बार एआई तकनीक भी रोल अदा कर रही है।
इसकी मदद से साफ्टवेयर की ताकत में इजाफा हुआ है और वह खुद इतनी क्षमता से लैस हो गई है कि टीम जो फोटो अपलोड करेगी उसमें यदि पक्की ईंट का प्रयोग हुआ होगा तो साफ्टवेयर खुद ही इसकी छंटनी कर देगा और किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो सकेगी।
जनपद में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का सर्वे चल रहा है। इसके लिए 12 विकास खंडों में 308 टीम लगाई गई है। टीम में ग्राम विकास अधिकारी, लेखपाल, जेई व अन्य शामिल हैं जो घर-घर पहुंच कर पात्रों को आवास सूची में शामिल कर रहे हैं। परियोजना निदेशक डीआरडीए रामदरश चौधरी ने बताया कि सर्वे में लाभार्थियों का डिटेल मोबाइल माध्यम से उनके घर पर ही ऑनलाइन फीड हो रहा है।
सर्वे का एप कैमरा एआई से लैस है जो लाभार्थी की आंख की रेटिना स्कैन करता है और घर की स्थिति का मूल्यांकन करता है। यदि किसी आवेदक के घर की दीवारें पक्की हैं तो साॅफ्टवेयर तुरंत पता लगा लेगा और नाम अपने आप ही फिल्टर हो जाएगा। इसमें न तो सर्वे टीम को कुछ करना है और न ही अन्य जिम्मेदार ही कुछ कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि आवास सत्यापन तीन स्तर पर करने की व्यवस्था है।
पहले स्तर पर एआई आधारित सत्यापन। दूसरे चरण पर जिलास्तरीय अधिकारियों के माध्यम से और तीसरे स्तर पर ब्लाक अधिकारियों से सत्यापन होना है। सर्वे करने वाले करने कर्मी का भी बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया है जिससे कोई अन्य कर्मी सर्वे न कर सके। पहली बार आवेदक को कोई फार्म नहीं भरना है सभी प्रक्रिया पेपरलेस है।