महराजगंज। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का जाल गांव-गांव तक फैला है। आसान किस्तों के झांसे में कर्ज लेने के बाद किस्त चुकाने में परेशान महिलाएं घर छोड़ने को मजबूर हो रही हैं।
वसूली करने वाले एजेंटों की अभद्रता से परेशान महिलाएं घर छोड़कर इधर-उधर चली गईं हैं। एजेंट रोजाना घर आते हैं। आसपास पूछताछ कर चले जाते हैं। पनियरा थाना क्षेत्र के बैदा खास की रहने वाली रेखा ने अपनी बेटी की शादी के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 2 लाख 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था।
यह राशि पांच किस्त में ली गई थी, लेकिन 22 प्रतिशत की अधिक ब्याज दर के चलते कुछ ही समय में यह कर्ज बढ़कर करीब चार लाख रुपये हो गया। समय पर भुगतान न कर पाने के कारण फाइनेंस एजेंटों का दबाव बढ़ता गया।
इससे परेशान होकर रेखा ने अपनी 24 डिस्मिल खेत गिरवी रख दी। लगातार बढ़ते ब्याज के चलते यह रकम चुकाना मुश्किल होता गया। इससे मजबूर होकर महिला को अपनी जमीन बेचनी पड़ी। बावजूद इसके वह पूरी तरह कर्ज से मुक्त नहीं हो पाई। आरोप है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट लगातार दबाव बना रहे थे। जब महिला समय पर पैसा नहीं दे सकी तो एजेंट सिलिंडर, चूल्हा और अन्य घरेलू सामान उठा ले गए।
यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई की महिला अपने पति बालकेश, तीन बेटियों और एक बेटे के साथ लेकर दिल्ली चली गई। महिला के देवर भाने प्रसाद ने बताया कि भाई-भाभी और बच्चे दिल्ली में हैं। घर पर कोई नहीं रहता है। उन लोगों से बातचीत होती रहती है। कर्ज का किस्त जमा करने के लिए वे लोग रकम की व्यवस्था में लगे हैं। बड़हरा लाला गांव के रामनयन अपने बीमार भाई धर्मराज के इलाज के लिए माइक्रो फाइनेंस एजेंट के माध्यम से 45-45 हजार रुपये का कर्ज तीन किस्त में अपनी मां सुभावती और पत्नी सुमन के नाम से लिया था। ऊंची ब्याज दरों की वजह से यह रकम चार लाख रुपये के करीब पहुंच गई। रामनयन ने बताया कि कर्ज चुकाने के चक्कर में उसे अपनी 18 डिस्मिल जमीन बेचनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद कर्ज खत्म नहीं हुआ। इसी दौरान छह महीने पहले भाई धर्मराज की इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई, लेकिन कर्ज का बोझ बढ़ता ही गया।
ब्याज दर अधिक होने के कारण परिवार लगातार कर्ज के दलदल में फंसता गया। रामनयन का आरोप है कि माइक्रो फाइनेंस एजेंट लगातार उसकी पत्नी सुमन को धमकाते हैं और गाली-गलौज करते हैं। कुछ दिन पहले एजेंटों ने जबरन उसकी बाइक और मोबाइल छीनकर बेच दिया। परिवार इस कर्ज और उत्पीड़न से इतना परेशान हो गया कि अब मजदूरी करने के लिए बाहर रहने को मजबूर है। मंसूरगंज की रहने वाले शांति ने चार किश्तों में 30-30 हजार रुपये लिया था। पति परशुराम के साथ गोरखपुर में मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करती हैं। सात बेटियों में एक का विवाह हो चुका है। किस्त जमा करने के लिए एजेंट दबाव बनाते हैं। इसी गांव की विद्यावती देवी का कहना है कि माइक्रो फाइनेंस समूह से तीन किश्त 40-40 रुपये ली।
घर पर एजेंट आकर परेशान करते हैं। दो किश्त दे चुकी हूं। वहीं सुभद्रा का कहना है कि माइक्रो फाइनेंस समूह से तीन किश्तों में 45-45 हजार ली। अधिक ब्याज होने के कारण बहुत परेशानी हो रही है। एजेंट घर पर आकर धमकी और गाली-गलौज देते हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण किस्त जमा नहीं हो पा रही है।