बीते एक साल में जिले में गन्ने के रकबे में हुई 1241 हेक्टेयर की वृद्धि
साल 2025 में जिले के 18077 हेक्टेयर में हुई थी गन्ने की खेती, इस साल 20017 हेक्टेयर में बोया गया है गन्ना
महराजगंज। कभी गन्ने के खेती के लिए मशहूर महराजगंज के किसानों ने तीन दशक पूर्व गन्ने की खेती छोड़ गेहूं व धान सहित सब्जी की खेती करने लगे। इस वजह से जिले में गन्ने की खेती का रकबा कम होता चला गया। तीन दशक बाद हालत बदले हैं। पिछले एक वर्ष में गन्ने की खेती का रकबा 1241 हेक्टेयर बढ़ा है।
जानकारी के अनुसार, जिले में पहले घुघली, सिसवां, निचलौल के अलावा अन्य क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार अधिक होती थी। लेकिन घुघली, फरेंदा, कप्तानगंज शुगर मिल बंद होने से किसानों को गन्ना की आपूर्ति में परेशानी होने लगी। धीरे-धीरे गन्ने की फसल की बोआई कम होने लगी। लेकिन सिसवां चीनी मिल के अलावा पिपराइच चीनी मिल के पेराई सत्र से गन्ने के फसल में अपना लाभ देखते हुए इन क्षेत्रों के किसान गन्ने की फसल का रकबा बढ़ा रहे हैं।
गन्ना विभाग के आंकड़ों की माने तो साल 2025 में जहां जिले में 18776 हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई थी और 2026 में जिले के 20017 हेक्टेयर में गन्ने की खेती की गई है। विभाग का दावा है कि गन्ने की खेती का रकबा बढ़ने के पीछे की असल वजह किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान मिलना है।
गन्ने की फसल का भुगतान समय से होने के कारण अब इसकी खेती में कोई समस्या नहीं आ रही है। गन्ने का न्यूनतम समर्थन दर भी बढ़ा है। अब गन्ने से होने वाली आय में इजाफा हो रहा है।
गन्ना किसान आद्या पांडेय निवासी चुअनी
अगर केंद्र पर गन्ने की खरीद ठीक ढंग से हो जाए तो और ज्यादा संख्या में लोग गन्ने की खेती करनी शुरू कर देंगे। पेराई सत्र के दौरान अब भी यहां गन्ना किसानों को 3 से 4 दिन तक गन्ना लेकर रुकना पड़ता है। केंद्र पर सुधार करने की जरूरत है।
-गन्ना किसान अजीत सिंह निवासी घुघली
किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही विभाग द्वारा किसानों के बीच प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। यहीं कारण है कि जिले में गन्ने का रकबा बढ़ रहा है। इससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलेगा।
- ओम प्रकाश सिंह यादव, जिला गन्ना अधिकारी महराजगंज