रजिस्ट्री कार्यालय में बैनामा कराने वाले लोगों की लगी भीड़।
महराजगंज। जिले में जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए राहत भरी खबर है। अब रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के लिए तहसील के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई व्यवस्था के तहत, रजिस्ट्री होते ही जमीन खरीदने वाले का नाम स्वतः खतौनी में दर्ज हो जाएगा। इसके लिए राजस्व परिषद और स्टांप एवं निबंधन विभाग के सॉफ्टवेयर को आपस में जोड़ा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले में सदर, फरेंदा नौतनवा और निचलौल तहसील हैं। वर्तमान में जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज के लिए तहसील में अलग से आवेदन करना पड़ता है। नियमानुसार, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया 35 से 40 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए लेकिन कई मामलों में छह से सात महीने बीतने के बाद भी लोगों का नाम खतौनी में दर्ज नहीं हो पाता। इससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बार-बार तहसील के चक्कर लगाने, कागजी कार्रवाई और देरी के कारण लोग हताश हो जाते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है, जिससे दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सरल और त्वरित किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत, स्टांप एवं निबंधन विभाग और राजस्व परिषद की वेबसाइट को तकनीकी रूप से एकीकृत किया जा रहा है। इसके लिए गांवों की घरौनी और राजस्व रिकॉर्ड को बारकोड से जोड़ा जाएगा। रजिस्ट्री कार्यालय में जब कोई जमीन की रजिस्ट्री कराएगा, तो कंप्यूटर पर दाखिल-खारिज का विकल्प स्वतः उपलब्ध होगा। तहसील के सर्वर से लिंक होने के कारण खतौनी का पूरा डाटा तुरंत उपलब्ध हो जाएगा। इस डाटा का मिलान कर रजिस्ट्री के समय ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से भी छुटकारा मिलेगा। लेकिन यदि रजिस्ट्री या दाखिल-खारिज के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत सामने आती हैं तो उसे जांच के लिए तहसील कार्यालय भेजा जाएगा। वहां संबंधित अधिकारी मामले की गहन जांच करेंगे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। इस व्यवस्था से न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी अंकुश लगेगा। बंशी कुमार वीरेंद्र, मनोज, बृजेश कुमार, कपिल, संतोष कुमार आदि का कहना है कि पहले दाखिल-खारिज के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था और कई बार दलालों के चक्कर में पड़ना पड़ता था। अब इस नई व्यवस्था से उनकी मुश्किलें कम होंगी। उप निबंधक सदर कमलेश चंद्र वर्मा ने बताया कि प्रशासन का यह कदम डिजिटल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो जमीन से जुड़े लेन-देन को और अधिक सुगम और विश्वसनीय बनाएगा।