दुकानों पर बिक रहा पैकेट में कुट्टू का आटा।संवाद
महराजगंज। धंधेबाजों ने व्रत सामग्री में मिलावट का खेल शुरू कर दिया है। इनकी मांग अधिक होने के कारण बिक्री तेज होती है। ऐसे में मौके का फायदा उठाकर धंधेबाज मोटा मुनाफा कमाते हैं। खरीदने के दौरान शुद्धता पर संशय रहता है।
इसे देखते हुए महिलाएं खाद्य सामग्री घर में तैयार कर रही हैं। मिलावट का खेल सबसे ज्यादा सिंघाड़े और कुट्टू के आटे व तिन्नी के चावल में किया जा रहा है। इसके अलावा साबूदाना में भी मिलावट की शिकायतें आ रही हैं।
नवरात्र व्रत को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम जांच अभियान चला रही है। खाद्य पदार्थों की शुद्धता को बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है। नवरात्र में कुट्टू के आटे की मांग अधिक रहती है। इसके साथ ही मूंगफली की बिक्री भी अधिक होती है। इससे धंधेबाज मोटा मुनाफा कमाते हैं।
180 रुपये से 220 रुपये प्रति किलो की दर से मूंगफली बिक रही है। शहर में शास्त्री नगर के धीरेंद्र कुमार ने बताया कि बीते दिन एक किलो मूंगफली खरीदी थी। इसमें 100 ग्राम से अधिक दाना खराब मिला। मिलावट को देखते हुए सामान खरीदने के दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है। कुट्टू का आटा ग्लूटेन-मुक्त आटा है, जो फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से भरपूर होता है। इसीलिए नवरात्र या किसी व्रत में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। धंधेबाज कुट्टू का स्टॉक मंगवाकर पहले ही रख लेते हैं। नवरात्र से पहले इसे पीसकर छोटे पैकेट में भरकर दुकानों तक पहुंचा दिया जाता है। थोक में 75 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव खरीदकर इसे 140 से 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव बेच दिया जाता है।
सूत्रों की मानें तो सिंघाड़ा और कुट्टू का आटा 140-160 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसमें मिलावटखोर अरारोट और पिसा चावल मिलाकर आटा ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
देशी घी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर हो रहा है। कई छोटी-छोटी कंपनियों की पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देशी घी बाजार में उपलब्ध है। इन गुमनाम कंपनियों की पैकिंग में देशी घी वाली खुशबू भी नहीं रहती। जबरदस्त गर्मी के बावजूद यह देशी घी जमा रहता है। जबकि शुद्ध देशी घी गर्मी में अपने आप पिघल जाता है।