सिसवा बाजार। इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) की सिसवा चीनी मिल में शनिवार को शीरे की टंकी फटने से छह मजदूर घायल हो गए। घायलों को डेढ़ घंटे बाद पीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद चिकित्सकों ने घर भेज दिया। घटना के बाद से मिल बंद है।
चीनी मिल में शनिवार को मजदूर करीब 65 फीट ऊंचाई पर बने पैन फ्लोर पर कार्य कर रहे थे। भोर में करीब 4:30 बजे अचानक शीरे की टंकी फट गई। गर्म शीरा शरीर पर पड़ने से छह मजदूर विशुनपुरा कुशीनगर निवासी रामानंद यादव, गौरी बाजार देवरिया निवासी सुनील कुमार यादव, मोहदीनपुर महराजगंज निवासी हीरामन, लक्ष्मीपुर कोट महराजगंज निवासी हरिश्चंद्र, हरखोली लार देवरिया निवासी लल्लन यादव और बरडिहा परशुराम देवरिया निवासी राजेश्वर मद्धेशिया जल गए। हादसे के बाद मिल में भगदड़ मच गई। गनीमत रहा कि पूरा शीरा मजदूरों के ऊपर नहीं गिरा, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के डेढ़ घंटे बाद घायल मजदूरों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिसवा पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया। घटना के बाद मिल बंद कर दी गई। मिल प्रबंधन टंकी को ठीक कराने में जुट गया है।
यूनिट हेड ओपी वर्मा का कहना है कि शीरे की टंकी का कवर निकलने से हादसा हुआ। इसमें कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है। एक दिन में ठीक हो जाएगा।
सूचना के बाद भी नहीं ठीक कराई टंकी
घायल मजदूरों ने बताया कि टंकी में कई दिनों से लीकेज थी। इसकी सूचना मिल प्रबंधन को कई बार दी गई, लेकिन ठीक नहीं कराया गया। मिल प्रबंधन की लापरवाही से यह हादसा हुआ।
खतरे में काम कर रहे मजदूर
सिसवा। सिसवा चीनी मिल में 95 स्थायी और 95 सीजनल कर्मचारी हैं। इसके अलावा 250 दैनिक भोगी मजदूर कार्य कर रहते हैं। मजदूरों के मुताबिक सुरक्षा का मिल मेें कोई इंतजाम नहीं है। कंपनी नियम के मुताबिक खतरनाक काम करने वाले मजदूरों को सेफ्टी शूज, हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट दिया जाना चाहिए। लेकिन सिसवा चीनी के मजदूरों यह सामग्री नहीं दी गई है। इससे यहां के मजदूर और कर्मचारी जान जोखिम में डालकर कार्य करने को मजबूर हैं। दुघर्टना और सुरक्षा बीमा भी नहीं कराया गया है।
पहले भी हो चुका है हादसा
सिसवा चीनी मिल में हादसा कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2011-2012 में पेराई शुरू होने के कुछ दिन बाद ही लोहेपार निवासी मजदूर गुगुल पांडे की क्रेन में गिरने से मौत हो गई थी।