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डायरिया का प्रकोप, चार दिन में 50 से अधिक पीड़ित

Mon, 29 Jul 2013 05:33 AM IST
Maharajganj
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महराजगंज। दूषित जल और साफ-सफाई नहीं होने के कारण जिले में कई इलाकों में डायरिया का प्रकोप फैल गया है। चार दिन में 50 से अधिक लोग इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। जिले से स्वास्थ्य विभाग ने पानी के 12 नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे थे। इनमें से तीन जगहों के हैंडपंपों का पानी दूषित मिला। स्वास्थ्य विभाग इन हैंडपंपों का पानी नहीं पीने की सलाह लोगों को दे रहा है। चार हैंडपंपों के पानी का सैंपल सोमवार को लखनऊ जांच के लिए भेजा जाएगा।
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दूषित पानी के सेवन और फूड प्वाइजनिंग के चलते 23 जुलाई को नौतनवां क्षेत्र के बरगदवां अयोध्या में डायरिया फैल गया। इस बीमारी से गांव के आल्हा प्रसाद, सुनीता, वंदना, पंचम, बद्रीनाथ, विष्णु, सुशीला, तारा देवी, सुभावती, सोनी, अंजू, शकुंतला, शकुंतला, संतू, पुनीता, जनार्दन, दयाराम और वरुण सहित 40 लोग बीमार हो गए। लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लक्ष्मीपुर, रतनपुर और निजी चिकित्सालयों में भर्ती कराया गया। 25 जुलाई को इसी गांव के भरत, चांदनी, कामिनी, शैलेश, कमलावती डायरिया से बीमार हो गईं। इन सभी को सीएचसी लक्ष्मीपुर में भर्ती कराया गया। 26 जुलाई को इसी गांव का लालमन डायरिया की चपेट में आ गया।
दूसरी ओर सदर कोतवाली क्षेत्र के बांसपार बैजोली निवासी सहराती, इसी क्षेत्र के कमहिया निवासी धर्मवती, पनियरा क्षेत्र के जड़ार निवासी मोहम्मद सलीम को उल्टी-दस्त होने पर जिला संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। चार दिनों में जिले में डायरिया से 50 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं।
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यहां का पानी खराब
जिला स्वास्थ्य टीम के डॉक्टर अरुण वर्मा ने बताया कि बरगदवां अयोध्या में दूषित पानी पीने से लोग डायरिया से पीड़ित हुए थे। टीम गांव में लगे चार इंडिया मार्क-2 हैंडपंपों का पानी जांच के लिए जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला लखनऊ सोमवार को भेजेगा। इसके पहल जांच में गांव के आद्या और शंभूनाथ के घर के सामने लगे इंडिया मार्क हैंडपंप का पानी दूषित मिला था। उसका पानी सेवन करने से लोगों को मना कर दिया गया है।
वैसे डायरिया एवं जल जनित बीमारी एईएस को देखते हुए इस वर्ष चार ब्लॉकाें के 12 हैंडपंपों का पानी का जांच के लिए भेजा गया था। इसमें फरेंदा ब्लॉक के जोगियाबारी, परतावल ब्लॉक का गोधवल और मंगलपुर के हैंडपंप का पानी दूषित मिला। एसीएमओ ने बताया कि महराजगंज और निचलौल के नौ हैंडपंपों के पानी की रिपोर्ट संतोषजनक है।
एसीएमओ डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि जिला स्वास्थ्य टीम प्रभावित गांव में डायरिया का कारण जानने के लिए हैंडपंप के पानी की शुद्धता, जल निकासी और साफ-सफाई आदि की जांच करती है। स्वास्थ्य टीम हैंडपंपों में क्लोरीन का पाउडर डालती है। इसके अलावा प्रत्येक घर में क्लोरीन की गोली और ओआरएस का वितरण करती है। लोगाें को साफ-सफाई से रहने और 20 लीटर पानी में क्लोरीन की एक गोली डालने की सलाह देती है।
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