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शतावर-तुलसी की खेती से किसानों की बढ़गी आमदनी

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तुलसी की खेती कर मालामाल हो सकते हैं किसान
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खेती के लिए 20 किसानों ने कराया पंजीकरण, उद्यान विभाग देगा 30 प्रतिशत अनुदान
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जिले में राष्ट्रीय आयुष मिशन को धारा देने के लिए उद्यान विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। दलहन-तिलहन की तरह औषध्यि खेती की तरफ किसानों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में जिले में वर्ष 2018-19 में तुलसी-सतावर की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए उद्यान विभाग ने किसानों से ऑनलाइन आवदेन मांगे हैं। अब तक 20 किसान पंजीकरण करा चुके हैं। तुलसी के लिए 10 हेक्टेयर और सतावर के लिए 2 हेक्टेयर का लक्ष्य शासन से मिला है। 30 फीसदी अनुदान किसानों को दिया जाएगा।
उद्यान विभाग के मुताबिक एक हेक्टेयर में सतावर की खेती में लागत 80 से 90 हजार रुपये आती है। तुलसी पर 40 से 45 हजार की लागत आती है। दोनों की खेती के लिए 30 प्रतिशत का अनुदान विभाग देता है। उद्यान विभाग का मानना है कि औषधिय गुणों से भरपूर तुलसी और सतावर की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ेगी। ऑनलाइन आवेदन के बाद पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर लाभार्थियों को चयन होगा। पंजीकरण में खतौनी, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो लगेगी। अनुदान की राशि सीधे डीबीटी के जरिए खाते में भेजी जाएगी।
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उद्यान निरीक्षक विकास सिंह श्रीनेत ने बताया कि अब तब 20 किसानों ने पंजीकरण कराया है। जिले में औषधिय खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। सतावरी को कई नामों से जाना जाता है। इस औषधि का उपयोग शक्ति बढ़ाने, दूध बढ़ाने ,दर्द निवारण एवं पथरी संबंधित रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। बुआई के लिए प्रति एकड़ पांच किलो बीज की आवश्यकता होती है। बाजार में सतावर के बीज का मूल्य 1000 किलो ग्राम तक रहता है। सतावर को बहुत ही काम सिंचाई की जरूरत होती है। जब पौधे के पत्ते पीले पड़ जाएं तो इसकी खुदाई कर के रसदार जड़ों को निकाल लें। एक हेक्टेयर में 8 से 12 क्ंिवटल का उत्पादन होता है। तुलसी का पौधा जितना पूजनीय है, उससे कहीं ज्यादा उसमें औषधिय गुण मौजूद हैं। तुलसी की खेती अब व्यावसायिक रूप लेने लगी है।
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