महराजगंज। मौसम विभाग की ओर से भारी बारिश होने को लेकर जारी की गई चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली है। बाढ़ से बचाव और राहत के लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें 24 घंटे अलर्ट रहने को कहा गया है।
जिले के 189 किलोमीटर बांधों में बसुली, रामनगर ठूठीबारी, नरायणी छितौनी, टेढ़वा, बेलसर रिगौली, नगवां, लेहड़ा, बंदेईया, भगवानपुर, चेहरी, झावाकोट, जर्दी डोमरा, डोमरा रिंग, अमहवां रिंग, लक्ष्मीपुर रिंग, बनरहा विस्तार, अनंतपुर बड़हरा, राजपुर दौलतपुर, जिगना और महाव नाला शामिल हैं। बचाव व राहत कार्य केे लिए बाढ़ चौकियों, शरणालयों, स्वास्थ्य सेवाओं के साथ साथ पशुओं के भी खानपान की व्यवस्था बनाई गई है। सदर तहसील में मुजुरी, लक्ष्मीपुर, जूनियर हाई स्कूल डोमरा, चेहरी, प्राथमिक विद्यालय चौपरिया,बागापार तथा घुघली में बाढ़ चौकी बनाई गई है। इसी प्रकार फरेंदा में खजुरिया, मिश्रौलिया, हाताबेला हरैया, धानी, बरगाहपुर में, निचलौल तहसील क्षेत्र के सोहगीबरवां, डोमा, बैठवलिया, रैनबसेरा, गड़ौरा, सिसवां, झुलनीपुर, पिपराकाजी तथा नौतनवां तहसील के डगरूपुर, तरैनी, खरिया, तहसील मुख्यालय, रघुनाथपुर, टेढ़ीघाट में बाढ़ चौकी स्थापित कर दिया गया है। इन बाढ़ चौकियों पर 200 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय ने बताया कि नदियों के जल स्तर पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया गया है।
बाढ़ बचाव को चिन्हित किए गए 218 गोताखोर
महराजगंज। अपर जिलाधिकारी बृृजभूषण वर्मा ने बताया कि बाढ़ से बचाव के लिए पूरे जिले के 218 गोताखारों व तैराकों को चिन्हित कर लिया गया। इन सभी के नाम व मोबाइल नंबर भी प्रशासन के पास मौजूद हैं। इन सभी 218 गोताखोरों में सदर तहसील के 73, फरेंदा के 11, नौतनवां के 126, तथा निचलौल के 8 गोताखार शामिल हैं। जबकि पूरेे जिले में कुल 98 नाव भी उपलब्ध हैं।
चिन्हित किए गए 134 नाविक
महराजगंज। अपर जिलाधिकारी बृजभूषण वर्मा ने बताया कि पूरे जिले में बाढ़ बचाव के लिए 134 नाविकों को चिन्हित किया गया है। ऐसे सभी नाविकों के नाम पता व उनके मोबाइल नंबरों को एकत्र कर लिया गया है जिससे आवश्यकता पड़ने पर उनकी सेवाएं ली जा सके।
वर्ष 2017 की बाढ़ मेें प्रभावित हुए थे 262 गांव
महराजगंज। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले साल 2017 में बाढ़ से कुल 262 गांव प्रभावित हुए थे, जिसमें से 109 गांव मैंरूंड हुए थे। करीब दो लाख की आबादी प्रभावित हुई थी। करीब 18159 हेक्टेअर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ था। करीब 17572 हेक्टेअर फसल प्रभावित हुई थी, जिसमें से करीब 14817 हेक्टेअर फसल की क्षति 33 प्रतिशत से ज्यादा हुई। जबकि 6501 मकानों की क्षति हुई थी।