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नेपाल से बाढ़ में बह कर आए गैंडे का रेस्क्यू लगातार पांचवे दिन जारी

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सोहगीबरवां। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नेपाल से बाढ़ में बह कर आए गैंडे का रेस्क्यू पांचवे दिन भी जारी है। वीटीआर प्रमंडल दो के डीएफओ अमित कुमार रेस्क्यू टीम की कमान संभाले हैं। वीटीआर एवं चितवन (नेपाल) के वन कर्मी गैंडे को पकड़ने की जद्दोजहद कर रहे हैं। लेकिन वन कर्मियों को देख गैंडा जटाशंकर जंगल की ओर भाग गया। शावक गैंडा चंचल है और हाथी को देख अतिरिक्त पीएचसी के समीप जंगल से निकलकर जटाशंकर चेक नाका होते जटाशंकर वन क्षेत्र में चला गया। इससे वन कर्मियों की परेशानी बढ़ गई है। हालांकि वन कर्मियों की टीम गैंडे पर नजर रख रही है।
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नेपाल से आए गैंडा विशेषज्ञ रामकुमार ने बताया कि एक वयस्क गैंडे को तीन एमएल बेहोशी की दवा दी जाती है। चूंकि यह शावक है। इसलिए उसे 1.5 एमएल दवा दी जाएगी। उसको बेहोश करने के बाद उसके शरीर पर पानी डालकर उसका तापमान नियंत्रित किया जाएगा। उसके बाद उसे पिंजरे में डालकर एंटीडोट देकर होश में लाया जाएगा। गैंडा के सामान्य हो जाने पर उसे सुरक्षित चितवन वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा।
इस बाबत बाल्मीकि नगर रेंजर आरके सिन्हा ने बताया कि गैंडा रेस्क्यू अभियान जारी है। गैंडे की सुरक्षा के लिए वन कर्मियों की टीम को लगाया गया है। गैंडे को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि जब तक गैंडा पकड़ा नहीं जा रहा है, वे लोग उसके आसपास जाने की कोशिश न करें। वह हमला भी कर सकता है।
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वन विभाग की पकड़ में नहीं आया मगरमच्छ
रतनपुर। चकदह गांव के पोखरे में शनिवार की शाम को मगरमच्छ पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम मछुआरों को साथ लेकर जाल डाला लेकिन मगरमच्छ पकड़ में नहीं आया। नौतनवां थाना क्षेत्र के गांव चकदह के बेलहिया टोले के पास पोखरे में बाढ़ के दौरान मगरमच्छ आए हैं। रविवार को हशीबुल्लाह के बत्तक पोखरे में तैर रहे थे। दो बत्तक को मगरमच्छ ने निगल लिया। आसपास के लोगों ने शोर मचाया और ग्रामप्रधान प्रतिनिधि अब्दुल सत्तार को जानकारी दी तो उन्होने वन विभाग को सूचना दी। उत्तरी चौक रेंज के रेंजर जगन्नाथ प्रसाद ने अपनी टीम वनरक्षक राजेश कुमार श्रीवास्तव, रामदेव, सोलहू वाचर के साथ मौके पर पहुंचे। काफी प्रयास के बाद भी मगरमच्छ पकड़े नहीं जा सके।
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रेंजर जगन्नाथ प्रसाद ने बताया कि काफी प्रयास किया गया लेकिन पानी अधिक होने के कारण मगरमच्छ नहीं पकड़े जा सके।
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