महराजगंज। सिंहाभार स्थित मां भगवती के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भोर से ही भक्तों के आने का क्रम शुरू हो जाता है। श्रद्धालुगण नवरात्र में यहां विशेष पूूजा - अर्चना के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं के अटूट आस्था का केंद्र बने इस मंदिर क्षेत्र के आसपास के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां भगवती पूरा करती हैं।
कथाओं के अनुसार सदियों पहले डगरुपुर क्षेत्र का सिंहाभार गांव घना जंगल था। जंगल में एक अहंकारी राजा महल बनाकर रहता था। इसी जंगल में एक दिन राजा ने देवी स्थान के सामने नील की फैक्ट्री लगाने का निर्णय लिया। उसी रात को मां भगवती ने स्वप्न में राजा को देवी स्थान के सामने नील की फैक्ट्री लगाने से मना किया। लेकिन घमंडी अहंकारी राजा भगवती की बातों को दरकिनार करते हुए नील की फैक्ट्री का निर्माण सुर्खी चूना से कराने लगा। यह देख मां भगवती हिरन रूप धारण कर नील की फसल को नष्ट करने लगीं। फसल का नुकसान देख राजा एक रात बंदूक लेकर झाड़ियों में छिप गया। देर रात मां भगवती हिरन रूप धारण कर नील की फसल को चरने लगीं, यह देख राजा ने हिरन पर गोली चला दी, जो हिरन रूपी मां भगवती के सिर पर जा लगी। गोली लगते ही मां भगवती देवी स्थान के पास स्थित खाज के पेड़ के पीछे पत्थर रूप धारण कर जमीन में धंस गईं। वहीं राजा का सर्वनाश हो गया। वहां आज भी मां भगवती पिंड के रूप विराजमान हैं। जैसे ही इसकी जानकारी लोगों को हुई तो देवी स्थान पहुंच लोग मन्नते मांगने लगे और लोगों की मुरादें पूरी होने लगीं। जिससे सिंहाभार मां भगवती का मंदिर आस्था का केंद्र बन गया। मंदिर के पुजारी छोटई ने बताया कि खास कर रविवार, सोमवार, मंगलवार को दूर - दूर से श्रद्धालु मंदिर में हवन - पूजन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र पर्व पर पड़ोसी मुल्क नेपाल समेत भारतीय क्षेत्र के भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।