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Maharajganj News: जिले में 201 स्कूली वाहन अनफिट, 258 के पास परमिट नहीं

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महराजगंज। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग की ओर से की जा रही जांच में वाहनों की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। जिले में जांच के दौरान 201 स्कूली वाहन अनफिट मिले हैं जबकि 258 वाहनों के पास वैध परमिट नहीं है। इसके बावजूद कई स्कूल संचालक इन वाहनों का संचालन कर रहे हैं।
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परिवहन विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधकों को वाहनों की फिटनेस कराने और जरूरी अभिलेख दुरुस्त करने के लिए लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अभियान के दौरान 35 स्कूली वाहनों का चालान किया गया जबकि विभिन्न कागजात में कमी और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले 15 वाहनों को जिले के अलग-अलग थानों में बंद कराया गया है।
स्कूली वाहनों की फिटनेस और परमिट की स्थिति की जांच लगातार की जा रही है। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन मिले हैं जिनकी फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है। वहीं कई वाहनों के पास वैध परमिट भी नहीं है।
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एआरटीओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि स्कूल संचालकों को समय-समय पर पत्र भेजकर वाहनों की फिटनेस जांच कराने और जरूरी अभिलेख पूरे करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद जिन वाहनों की फिटनेस नहीं कराई गई है, उनके खिलाफ अब कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत 35 स्कूली वाहनों का चालान किया गया है। कागजात में कमी और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले 15 वाहनों को अलग-अलग थानों में बंद कराया गया है। विभाग का उद्देश्य स्कूली वाहनों को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित कराना है, ताकि बच्चों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।

थानाध्यक्षों से भी मांगा सहयोग
एआरटीओ ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के माध्यम से संबंधित थानाध्यक्षों को भी पत्र भेजा गया है। इसमें अनफिट और बिना परमिट संचालित हो रहे स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग मांगा गया है। उन्होंने कहा कि विभाग की कार्रवाई से स्कूल संचालक अपने वाहनों के अभिलेख दुरुस्त कराने के साथ ही निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करेंगे।

फिटनेस जांच में इन मानकों की होती है जांच
स्कूली वाहन की फिटनेस जांच के दौरान ब्रेक, टायर, लाइट, स्टीयरिंग, शीशे समेत अन्य तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है। वाहन निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। ऐसे में अनफिट वाहन से स्कूली बच्चों को ले जाना जोखिम भरा माना जाता है।
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