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मीटर लगने के बाद भी मिल रहा पहले की तरह बिल

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बिजली - फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। देहात क्षेत्रों में कटिया राज को खत्म करने के लिए बिजली निगम करोड़ो रूपये की लागत से पूर्वांचल में मीटर लगवाने की योजना शुरू की है। इसके तहत जिले में करीब आठ करोड़ 82 लाख रूपये की लागत से 90 हजार ग्रामीण उपभोक्ताओं के घर मीटर लगाए गए हैं। लेकिन अभी तक अधिकांश मीटर चालू नहीं हो सके हैं। इस कारण कटिया राज (कांटा लगाकर बिजली जलाने) कायम है और ग्रामीण मीटर चालू कराना चाह रहे हैं। लेकिन अफसर समय आगे खींचते जा रहे हैं। इस दौरान ग्रामीणों को फ्लैट रेट पर ही बिल मिल रहा है।
विद्युत निगम कार्यालय के मुताबिक जिले भर में बिजली का प्रयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या करीब 1 लाख 71 हजार है। इसमें करीब 90 हजार उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाने का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं करीब 81 हजार उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाने का कार्य चल रहा है। देहात अंचल में विद्युत मीटर से जारी होने वाली रीडिंग शहरी क्षेत्र के मुकाबले काफी सस्ती है। करीब 3 रूपये प्रति यूनिट है। विद्युत नियामक आयोग ने अनमीटर्ड कनेक्शन की विद्युत दरों में बंपर बढ़ोत्तरी कर दी थी। इन दिनों देहात अंचल के उपभोक्ताओं को दो किलोवाट क्षमता के कनेक्शन पर करीब 650 रूपये मासिक चुकाना पड़ रहा है। जिले में मीटर पर करीब 8 करोड़ 82 लाख अब तक खर्च करने के बाद भी उपभोक्ताओं को पहले की तरह फ्लैट रेट के बिल भेजे जा रहे हैं। यहीं कारण है कि मीटर लगे होने के बावजूद भी गांवों में कटिया डालने वालों का बोलबाला है। इसमें ओवर लोडिंग और राजस्व की क्षति निगम को हो रही है। एक मीटर लगाने का खर्च 980 रूपये आता है।
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अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम हरिशंकर ने कहा कि मीटर लगने से ग्रामीण अंचल के उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इससे जितनी बिजली खर्च करेंगे उतना ही रूपये का बिल देना होगा। इससे ओवर लोड की समस्या भी कम होगी। देहात अंचल में करीब 90 हजार विद्युत मीटर लगाए जा चुके हैं। बाकी स्थानों पर कार्य चल रहा है। मीटर चालू कराया जा रहा है। जल्द ही देहात में फ्लैट रेट की जगह रीडिंग के बिल भेजे जाएंगे। कटिया लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सौभाग्य योजना की किट को डकार रहे ठेकेदार
सौभाग्य योजना के तहत ग्रामीण अंचल में कनेक्शन लेने पर उपभोक्ताओं को बिजली मीटर, केबल, एलईडी बल्ब, शाकिट, कट आउट आदि किट दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन यह सभी ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रहे है। बल्कि ठेकेदार डकार रहे हैं। ऐसा सौभाग्य योजना के कुछ लाभार्थियों ने यह आरोप ठेकेदारों पर लगाया है। सौभाग्य योजना के तहत 18775 कनेक्शन दिए जा चुके हैं। जबकि 2 लाख 17 हजार लोगों को कनेक्शन देने की प्रक्रिया चल रही है।
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