महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर बने मदरसे पर अनाधिकृत अतिक्रमण के मामले को लेकर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। मामला राजस्व का होने के कारण विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए कार्रवाई आगे बढ़ रही है।
जिले में 19 मदरसे चिह्नित हैं। ये नेपाल बाॅर्डर से 10 किमी के दायरे में भारतीय क्षेत्र में हैं। बीते दिन निचलौल क्षेत्र के गेडहवा से मजार के पास से अतिक्रमण हटाया गया था। सूत्रों की माने तो फरेंदा थाना क्षेत्र के कोल्हुई में 40 वर्षों से मदरसे की देखरेख एक व्यक्ति के जिम्मे है। इसका मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
वहीं खरहरवा में स्थित मदरसे की देखभाल 35 वर्षों से एक व्यक्ति पर है। बड़गो गांव में 30 वर्षों से मदरसा संचालित है। एक को छोड़कर 18 मदरसे का मामला धारा 67/1 के तहत कार्रवाई जारी है।
नौतनवा थाना क्षेत्र के पिपरा में 10 वर्ष से मदरसा, खेरहवा दुबे 20 वर्ष मस्जिद, मारजादपुर में 20 वर्ष से मस्जिद और मदरसा संचालित है। वहीं जुगौली में 50 वर्ष से मदरसा, परसौनी कला में 40 वर्ष से मदरसा, बटईडीहा में 30 वर्ष से मस्जिद, जारा में 30 वर्ष से मदरसा, विश्खोप में 10 वर्ष से मदरसा, कोहड़वल में 20 वर्ष से मदरसा, मुहुअवा नंबर 1 में 22 वर्ष से मस्जिद, मोगलहा में 30 वर्षों से मस्जिद संचालित है।
वहीं निचलौल थाना क्षेत्र के गेडहवा गांव में 6 वर्षों से संचालित मजार से 26 अप्रैल को प्रशासन ने अतिक्रमण हटवा दिया था। छितौना गांव में 20 वर्षों से संचालित मदरसे के पास से अतिक्रमण हटाया जाएगा। रामनगर गांव में 12 वर्षों से ईदगाह संचालित है।
वहीं अमडा उर्फ झलनीपुर में 15 वर्षों से मजार, शीतलापुर में 10 वर्षों से मदरसा संचालित है। भारत नेपाल सीमा के नजदीक शेख फरेंदा गांव में मस्जिद और मदरसा के कमेटी के सदस्य समीउल्लाह ने बताया कि यह मस्जिद मदरसा बहुत पुराना है। यह जमींदारों ने दान में दिया था। पहले छप्पर का फिर खपरैल का फिर पक्का बन गया है। यह लगभग आठ डिस्मिल में है। इसका रजिस्ट्रेशन है। लेखपाल इसके बारे में जानकारी ले गए हैं।
धारा 67(1) एक कानूनी प्रावधान है : दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता सुधांशु पांडेय ने बताया कि धारा 67(1) एक कानूनी प्रावधान है जो विभिन्न अधिनियमों में पाया जा सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 और भारतीय दंड संहिता, 1860 शामिल हैं। यह धारा विशिष्ट अपराधों और उनसे जुड़े दंड के बारे में है। उदाहरण के लिए, धारा 67(1) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के तहत, किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या दुरुपयोग करने या किसी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने पर दंड का प्रावधान करती है। वहीं भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत, धारा 67 जुर्माना न देने पर कारावास का प्रावधान करती है।