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कागज की सिपाही बन कर रह गयी शक्ति परी

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कागजी सिपाही होकर रह गई शक्ति परी
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अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। शक्ति परी जिले में कागजी सिपाही बनकर रह गई है। महिला सशक्तिकरण की बात सिर्फ दावों तक सिमट कर रहा गया। उधर, ‘अमर उजाला’ के ‘अपराजिता’ अभियान के तहत बेटियों व महिलाओं को सशक्त बनाने की कारगर पहल की जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से वर्ष 2016 में शुरू की गई योजना फाइलों तक सिमट कर रह गई है। बेटियों को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) का दर्जा देकर सिर्फ खानापूर्ति कर दी गई। तमाम छात्राओं को पता ही नहीं है कि शक्ति परी को क्या करना है। उन्हें किस तरह से पीड़ित की मदद करनी है, उन्हें इसका प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय का दावा है कि 136 स्कूलों में शक्ति परी बना दी गई हैं। अन्य स्कूलों को भी शक्ति के बारे में जल्द सूचना भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में 198 इंटर कॉलेज हैं। जहां कक्षा 10 से 12 तक की छात्राओं को शक्ति परी बनाने के निर्देश दिए गए थे। वर्ष 2016 में शुरू हुई यह योजना महराजगंज जिले में दम तोड़ रही है। यह योजना सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह गई है। योजना के तहत हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की छात्राओं को शक्ति परी बनाने को कहा गया था। 1090 के कंट्रोल रूम से हर साल आवेदन पत्र भेजे जाने की बात कही जाती रही है। छात्राओं को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। कार्यशाला के माध्यम से जानकारी देनी होती है लेकिन माध्यमिक शिक्षा विभाग एवं पुलिस की ओर से अभी तक सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। तमाम छात्राओं को शक्ति परी का मतलब भी नहीं पता है। शक्ति परी को काम क्या करना है, इसके बारे में भी उन्हें जानकारी नहीं है। हालांकि योजना के बारे में कहा जा रहा है कि इसके तहत पीड़िता व उसके परिवार वालों का मनोबल बढ़ाने तथा छात्राओं व महिलाओं को कानूनी जानकारी देना इसका मुख्य उद्देश्य है। शक्ति परी को हेल्प लाइन 1090 से जुड़कर कार्य करना होता है। इसके अलावा छात्राओं को विशेष पुलिस अधिकारी का दर्जा दिया जाता है।
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जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार सिंह का कहना है कि जिले में करीब 136 स्कूलों में शक्ति परी बना ली गई हैं। अन्य स्कूलों को भी शक्ति परी के बारे में जल्द सूचना भेजने को कहा गया है। शक्ति परी के रूप में चयनित छात्राओं को प्रशिक्षण देकर पीड़ितों की मदद करने योग्य बनाना है। साथ ही स्वयं की मदद के लिए आत्मनिर्भर बनाना भी है।
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एएसपी आशुतोष शुक्ला ने बताया कि लखनऊ के 1090 कंट्रोल रूम से शक्ति परी के प्रशिक्षण एवं चयन की व्यवस्था है। आवेदन पत्र वहीं से आते हैं। इस वर्ष आवेदन पत्र जिले में नहीं आए हैं। योजना शुरू होने के बाद स्कूलों में शक्ति परी का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया था।
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