महराजगंज। छुट्टा पशुओं ने शहर से लेकर गांव तक मुसीबत पैदा कर दी है। शहर की सड़कों पर जहां दुर्घटना के कारण बन रहे हैं, वहीं किसानों की फसलों को छुट्टा पशु बर्बाद कर दे रहे हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं होने से किसानों समेत लोगों में आक्रोश व्याप्त है। जिले में मात्र एक गोसदन है। जहां करीब 400 गायें रहती हैं। यहां उनके चारे आदि का प्रबंध है। इसके अलावा जिले में छुट्टा पशुओं के रहने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। बीते सप्ताह नजर डाले तो करीब आठ लोग शहर की सड़कों पर छुट्टा पशुओं से टकरा कर घायल हुए हैं।
शहर में छुट्टा पशुओं के कारण आने जाने में लोगों को दिक्कत होती है। यह कभी भी सड़क के बीच में आ जाते हैं। यही कारण है कि बीते एक सप्ताह में करीब 8 लोग घायल हो चुके हैं। पिपरदेउरां के रहने वाले संदीप प्रजापति पेट्रोल पंप की ओर से आ रहे थे। बलिया नाला पुल के पास छुट्टा पशु से टकरा गए। बाइक की गति धीमी होने के कारण हल्की चोट लगी। इसी तरह रविंद्र, राजेश, रत्नेश, सुरेश कुमार, वीरेंद्र कुमार, वरूण यादव आदि छुट्टा पशुओं से टकरा कर घायल हो गए। उधर छुट्टा पशु खेतों में लगी सब्जी की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। किसान भोरिक शर्मा कहते हैं कि छुट्टा पशु सब्जी की फसल को बर्बाद कर देते हैं। दिन रात खेत की निगरानी करनी पड़ती है। लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई कारगर प्रयास नहीं किया जा रहा है। समाज सेवी आत्मराम गुप्त कहते हैं कि पशु जब दूध देना बंद कर देते हैं तो लोग उन्हे छुट्टा छोड़ देते हैं। यह ठीक नहीं है। पशुओं के रखरखाव को लेकर लोगों को ध्यान देने की जरूरत है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर राजीव उपाध्याय ने बताया कि बेसहारा पशुओं के लिए आश्रय गृह का निर्माण होना है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। जमीन की व्यवस्था होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। नगर पालिका परिषद के ईओ वीरेंद्र राव ने बताया कि छुट्टा पशुओं से मुक्ति दिलाने के लिए कारगर उपाय किए जाएंगे, जिससे की नगर में लोगों को दिक्कत न हो। लोगों को भी पशुओं के रख रखाव को लेकर जागरूक होना पडे़गा।