फोटो (सभी पेजों के लिए स्थापना दिवस का मत्था लगाएं)
बहुत कुछ बदला पर अभी तय करना है लंबा सफर
‘अमर उजाला’ के स्थापना दिवस पर बोले लोग, जिला मुख्यालय रेल मार्ग से जुड़े तो बने बात
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जी हां, महराजगंज बदल रहा है। एक साल में ही यहां बहुत कुछ बदल चुका है। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को बेहतर करने का सफल प्रयास हुआ। हर मार्ग पर बसें दौड़ रही हैं। बेहतर सड़कों का जाल बिछ जाने से रफ्तार बढ़ गई है। कई सड़कें निर्माणाधीन हैं लेकिन बीते वर्ष भी पर्यटन विकास को बढ़ावा देने की योजना पर अपेक्षित अमल नहीं हो सका। लोगों के जेहन में यह बात आज भी चुभती है कि जिला मुख्यालय रेल मार्ग से नहीं जुड़ सका।
जनहित के मुद्दों पर अनवरत आगे बढ़ते हुए ‘अमर उजाला’ ने बीते वर्ष जहां जनता की आवाज बुलंद की वहीं शासन-प्रशासन को आइना भी दिखाया। इससे जिले के विकास को गति मिली। चाहे बाढ़ आपदा का वक्त रहा तो या फिर जनसरोकार की बात, हर मुद्दे पर ‘अमर उजाला’ ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए जनभावनाओं पर खरा उतरने का प्रयास किया। जहां तक शहर में बदलाव की बात है तो सचमुच में बहुत कुछ बदल चुका है। जिला अस्पताल, जिला मुख्यालय, स्टेडियम, पॉलिटेक्निक कॉलेज, रोडवेज वर्कशॉप, जिला कारागार, इंजीनियरिंग कॉलेज, दर्जिनिया ताल का विकास, महिला थाना, बेहतर सड़कें यहां के विकास की दास्तां बयां करती हैं। कुछ दिनों में मुख्य डाकघर भवन भी तैयार हो जाएगा। शहर में पासपोर्ट बनवाने की सुविधा शुरू हो चुकी है। यही नहीं, जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बन चुका है। नवजात शिशु देखभाल इकाई में बेड की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।
दूसरी ओर शहर में बाईपास का न होना लोगों के दर्द को बढ़ा देता है। जिला मुख्यालय रेलमार्ग का आज भी न जुड़ना लोगों को खलता है। इसके चलते विकास को गति नहीं मिल पा रही है। यातायात की लाइफ लाइन बसों के सहारे शहर एवं आसपास के वाशिंदों की आवाजाही होती है। लोगों में इस बात की भी टीस है कि अतीत की धरोहर ट्राम-वे रेल परियोजना, जंगल में काठ बंगला, देवदह टीला, विशुनपुर गबडुआ शहीद स्मारक की उपेक्षा हो रही है। इनके संरक्षण का कोई गंभीर प्रयास होता नहीं दिख रहा। दो अक्तूबर 1989 को जिला बनने वाला महराजगंज जनपद 2934 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां की आबादी 26,85,292 है और साक्षरता दर 65 प्रतिशत है।
अमर उजाला के गौरवशाली 12 वर्ष पर लोगों की प्रतिक्रिया
जनभावनाओं को मिलता है सम्मान
अमर उजाला समाचार पत्र में जनभावनाओं को पूरा सम्मान मिलता है। लोगों की पीड़ा को यह अखबार स्पष्ट रूप से उठाता है। इसका परिणाम भी दिखता है। जहां प्रशासन की भी नजर नहीं पड़ती, वहां की खबरें प्रकाशित कर जनता को लाभ पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है।
- डॉ. प्रवीण सिंह, शिक्षक
स्वस्थ आलोचना सराहनीय
आलोचना स्वस्थ रूप से की जाए तो बेहतर होती है। इसे ‘अमर उजाला’ ने बेहतर ढंग से समझा और इसको जनता के सामने प्रस्तुत भी किया है। यही कारण है कि यह समाचार पत्र लोगों की पसंद बन गया है। पूर्वाग्रहयुक्त आलोचना इस समाचार पत्र में कभी नहीं दिखी।
- आत्माराम गुप्त, व्यवसायी
अहम मुद्दों को उठाने में आगे
जनता से जुडे़ मुद्दों को उठाने में ‘अमर उजाला’ हमेशा आगे रहा है। यही कारण है कि 12 साल के सफर में यह समाचार पत्र पाठकों के बीच अपनी पैठ मजबूत करता गया। जनता की प्रमुख समस्याओं पर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराना इसकी प्रमुख विशेषता है।
- डॉ. घनश्याम शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान, जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज
सत्य एवं तथ्यपरक खबर है पहचान
खबरों में विश्वसनीयता रहती है। सत्य एवं तथ्यपरक खबर इसकी पहचान है। ‘अमर उजाला’ पाठकों को सही तथ्यों की जानकारी देने के साथ ही खामियों को उजागर करता रहता है। यही कारण है कि पाठकों से इसका गहरा नाता हो गया है।
- नवनीत धर दूबे, एडवोकेट, दीवानी कचहरी
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महराजगंज महोत्सव की कवरेज याद रहेगी
युवा पाठकों की नजर में ‘अमर उजाला’
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जिले के युवा पाठकों की नजर में फेंक न्यूज, पेड न्यूज ‘अमर उजाला’ के स्वभाव के विपरीत हैं। इस अखबार में जन कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से प्रकाशित करने के साथ ही युवा मन की बात को विशेष तरजीह दी जाती है। यही वजह है कि युवाओं के बीच इसकी अलग पहचान है।
आईटीएम कॉलेज की छात्रा नवरीन आबिद कहती हैं कि ‘अमर उजाला’ की खबरों में पारदर्शिता होती है। इसमें तथ्यों के आधार पर जनहित की बात तार्किक ढंग से प्रस्तुत की जाती है। ज्योति सिंह कहती हैं कि समय-समय पर विभिन्न मुद्दों पर खबरों का प्रकाशन एवं समाज में बेहतर कार्य करने वालों की पहचान दिलाने में ‘अमर उजाला’ सबसे आगे है।
दिब्या कांदू कहती हैं कि ऐतिहासिक स्थलों के विकास, जनभावनाओं से शासन-प्रशासन को अवगत कराने वाली खबरें इस समाचार पत्र में स्थान पाती हैं। पेड न्यूज तो इसके स्वभाव के विपरीत है। शशि मौर्या कहती हैं कि ‘अमर उजाला’ की खबरों की विविधता के कारण प्रेरणा एवं जागरूकता मिलती है। खबरों को फोटो के साथ बेहतर ढंग से प्रकाशित करने में इसका कोई जवाब नहीं है। महराजगंज महोत्सव में शुरू से अंत तक इसकी बेहतरीन कवरेज ने सबको प्रभावित किया। यही वजह है कि मंच के एलईडी स्क्रीन पर कई बार इस समाचार पत्र को प्रदर्शित किया गया।
अपराजिता का लोगो भी लगाएं
महिलाएं बोलीं, आवाज बुलंद करने का अनूठा मंच है अपराजिता
महराजगंज। अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें जागरूक करने का अभियान निर्बाध गति से बढ़ रहा है। नवंबर 2018 से शुरू हुए इस अभियान के तहत विविध कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलाई गई। बेटियों को आत्मरक्षा का गुर सिखाना, उन्हें कानून की जानकारी देना, गोष्ठी के जरिए महिला सशक्तिकरण का कार्य, मतदाता जागरूकता रैली, कानून की पाठशाला, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, पुलिस की पाठशाला, सेहत की पाठशाला समेत अन्य कार्यक्रमों का आयोजन इसी की कड़ी है। इस अभियान का असर भी दिखने लगा है। अब बेटियों की झिझक टूटी है। प्रमिला शुक्ला, मौसम, वंदना त्रिपाठी, अनिता पांडेय आदि महिलाओं का कहना है कि अपराजिता मुहिम निश्चित रूप से महिलाओं के लिए वरदान साबित होगी। इस अभियान से महिलाओं को आत्मबल मिल रहा है। महिलाओं की आवाज को बुलंद करने का अपराजिता अनूठा मंच है।