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कच्ची सड़क, झोपडी वन टागियां की पहचान

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उबड़-खाबड़ सड़कें तो समझो यही है वन टांगिया गांव
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विकास के दावों से इतर जमीनी हकीकत
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। उबड़-खाबड़ सड़कें और झोपड़ियां दिखाई दे तो समझ जाओ वन टांगिया गांव आ गया है। जी हां, यही है जिले की वन टांगिया गांवों की हकीकत। इस गांव के विकास के दावे तो बहुत किए जा रहे हैं, लेकिन गांव में जाने पर असलियत सामने आ जाती है। यहां रहने वाले करीब 19 हजार से अधिक मतदाता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं, लेकिन इनकी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पाई हैं। वन टांगिया गांव के रहने वालों के मुताबिक वोट लेकर जाने के बाद कोई आता नहीं है। रोजगार के नाम पर खेतीबाड़ी ही इनका प्रमुख आधार है।
जिले के चार तहसीलों में 18 वन ग्राम अब राजस्व गांव हैं। फरेंदा के वन ग्राम खुर्मपुर को लेहड़ा, वारीभैसी को मथुरा नगर और सूरपार टांगिया गांव को सेमरहनी से संबद्घ किया गया है। नौतनवां तहसील के वन ग्राम तिनकोनिया को लालपुर कल्यानपुर, कांधपुर दर्रा को कांधपुर, बेलौहा दर्रा को बेलौहाघाट, अचलग़ढ को कोल्हुआ तथा बीट नर्सरी की भूमि को बरगदवा राजा में शामिल किया गया है। सदर तहसील के वन ग्राम उसरहवा नर्सरी की भूमि को कटहरा, चेतरा नर्सरी को जयपुर उर्फ सलामतगढ़, हथिअहवा और बलुअहिया को सोनाड़ी, बरवांचंदन चाफी को चंदनचाफी, बेलासपुर को बेलासपुर तथा दौलतपुर को दौलतपुर में सम्मिलित किया गया है। निचलौल तहसील के वन ग्राम कंपार्टमेंट नंबर-24 को सेमरा कम्हरिया, कंपार्टमेंट नंबर 26 और 27 को परसाई तथा कंपार्टमेंट नंबर 28 को चंदनपुर में सम्मिलित किया गया है। एक नवंबर-2017 को इन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा मिला। 3796 अधिकार पत्र लोगों को दिया गया। 6125 परिवार वन ग्राम में हैं। 25689 वन ग्राम की आबादी है। वन ग्राम 27 नर्सरी में बच्चे खुले आसमान में पढ़ते हैं। यहां गांव में प्रवेश करते ही झोपड़ियां दिखाई देती हैं। कच्ची सड़कें पक्की होने का राह देख रही है। नेता चुनाव में आते हैं, लोकलुभान बातें कर चले जाते हैं। इनके दुख-दर्द से किसी को नाता नहीं है। वन ग्राम 27 नर्सरी के रहने वाले रामानंद बताते हैं कि वन ग्राम का जितना विकास होना चाहिए, उतना नहीं हुआ। वोट लेकर नेता चले जाते हैं। अभी योजनाओं का पूरा लोगों को नहीं मिल पा रहा है। बरसात में गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। विपत प्रसाद कहते हैं कि 1970 से वोट देते आ रहे हैं। सबसे पहले विधानसभा चुनाव में मत दिया था। मतदान के लिए वन ग्रामवासी आगे रहते हैं, लेकिन नेता समस्या दूर करने में पीछे रहते हैं।
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‘वन ग्राम में विकास प्राथमिकता’
सीडीओ पवन कुमार अग्रवाल कहते हैं कि वन ग्राम में विकास प्राथमिकता के आधार में हुआ है। आवास, पेंशन, शौचालय आदि की सुविधा दी गई है। वन ग्राम को राजस्व ग्राम का दर्जा मिल चुका है। आने वाले वक्त में वन ग्राम का तेजी से विकास होगा।
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‘3018 आवास का हो चुका है निर्माण’
महराजगंज। जिला समाज कल्याण अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास 3019, पात्र गृहस्थी कार्ड 4494, जननी सुरक्षा का लाभ 282, जॉब कार्ड 6125, शौचालय 251, अंत्योदय कार्ड 2741, हैंडपंप 155, स्वयं सहायता समूह 74, विधवा पेंशन 223, दिव्यांग पेंशन 82, स्ट्रीट लाइट 212 लगे हैं। इसके अलावा अन्य योजनाओं का लाभ दिया गया है। वन ग्राम में 2767 बच्चों को शिक्षा दी जाती है।
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