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प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर बरसे आन्दोलन पर डटे शिक्षा मित्र

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महराजगंज। महज दस हजार रुपये मानदेय की घोषणा से नाराज शिक्षामित्रों ने आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। तीन दिनों से कलेक्ट्रेट पर धरना दे रहे शिक्षामित्रों ने दो टूक कह दिया कि 10 हजार का मानदेय उन्हें स्वीकार नहीं है। सरकार को इस दिशा में दोबारा विचार करने की जरूरत है। अगर सरकार ने जल्दी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन और तेज होगा। भाकपा माले के जिला सचिव हरिश्चंद्र जायसवाल ने शिक्षामित्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार की तीखी आलोचना की।
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जिलाध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता ने ने कहा कि आंदोलन के तीन दिन हो चुके हैं लेकिन, सरकार की ओर से कोई पैगाम नहीं आया है। 10 हजार मानदेय कतई स्वीकार नहीं है। महंगाई के इस दौर में इतने कम मानदेय पर गुजर-बसर मुश्किल होगा। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से वार्ता की लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। उन्होंने कहा कि शिक्षक बनाने के साकार को कानूनी करनी चाहिए। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षामित्रों का हित नहीं चाहती है। यही वजह है कि शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने की राह में पेंच फंस रहा है।
महामंत्री शैलेंद्र नायक ने कहा कि शिक्षामित्र अपना अधिकार लेने के कमर कस कर तैयार हैं। सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन किया जाएगा। पता नहीं किन कारणों से प्रदेश सरकार कारगर कदम नहीं उठा रही है। तमाम शिक्षामित्रों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है। एनसीटीई एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव भेजा जाता तो भी समस्या का समाधान हो जाता लेकिन कोई कार्रवाई के बजाए सरकार की खामोशी समझ से परे है। एलान किया कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को धोखा देने का काम किया है, अब आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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इस दौरान जिला संरक्षक सनंदन पांडेय, गोपाल यादव, ओपी त्रिपाठी, हेमलता, रमाकांती, देवी, विजय लक्ष्मी, संध्या श्रीवास्तव, गोविंद सहानी, पूर्णमासी गौंड, मनोज प्रसाद, दयानंद पटेल, शत्रुघ्न यादव, सुरेंद्र वर्मा, साजिद खां, रामभवन चौरसिया आदि मौजूद रहे।
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