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चारा न पानी, दम तोड़ रहीं गोसदन की गायें

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चारा न पानी, दम तोड़ रहीं गोसदन की गायें
एक माह में गोसदन में 12 गायों की हो चुकी है मौत

अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। तपती धूप में ठीक ढंग से चारा व पानी नहीं मिलने से गोसदन मधवलिया में मवेशी एक-एक कर दम तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद गोसदन के मवेशियों की कोई सुध नहीं ले रहा है। हालत यह है कि करीब एक महीने के दौरान गोसदन में 12 गायें दम तोड़ चुकी हैं। गोसदन में बेहतर व्यवस्था होने के दावा तो किया जा रहा है कि लेकिन हालात दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
निचलौल तहसील क्षेत्र में मधवलिया गोसदन की स्थापना 1977 में हुई थी। यहां वर्तमान में करीब 1,300 गायों को रखने की क्षमता है। गोसदन के अंदर पांच गो-शरण स्थल हैं। यह ठीक हालत में हैं लेकिन तीन गो-आश्रय गृह बनाए गए हैं, जिनमें छुट्टा पशुओं को रखा जाता है। इनकी हालत यह है कि टिनशेड टूट गया है। टूटे टिनशेड की मरम्मत कराने में कोई रुचि नहीं ले रहा है। गोसदन में व्यवस्था के लिए 180 एकड़ क्षेत्र में गेहूं की खेती कांट्रैक्ट पर कराई गई थी। जिसके बदले खेती करने वालों को गोसदन के लिए पुआल एवं भूसा देना है। हरा चारा परिसर में कहीं नहीं दिखता। हर रोज 12 से 13 क्विंटल भूसे की खपत होती है। वर्तमान में 7 क्विंटल भूसा स्टोर में रखे होने की बात कही जा रही है। तीन एकड़ बाजरा लगाया गया था, जो पानी के अभाव में सूख गया। पंप खराब पड़ा है। पंपिंग सेट को दीवार के किनारे रखा गया है। परिसर में दीवार टूटी हुई है। वर्तमान में क्षमता से ज्यादा 1500 मवेशी इस गोसदन में हैं। गोरखपुर से करीब 200 छुट्टा पशुओं को यहां लाया गया है। इनके अलावा जिले में अन्य स्थानों से छुट्टा पशु गोसदन में लाए गए हैं। मधवलिया गो-सदन में हालत इन दिनों ज्यादा खराब है। चिलचिलाती धूप में मवेशी दम तोड़ रहे हैं। उन्हें न तो हरा चारा नसीब हो रहा है, न ही पीने के लिए पानी की बेहतर व्यवस्था है। परिसर में एक तालाब में पानी है और दूसरा सूखा हुआ है। जिस तालाब में पानी है, वहां घाट नहीं बना है। ऐसे में अगर कोई मवेशी अंदर चला जाता है तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। परिसर में जहां तहां मृत पड़ी गायों को पूछने वाला कोई नहीं है। एक माह के दौरान करीब 12 गायें मर चुकी हैं। टूटे हुए टिनशेड में गायें गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। कोरे भूसे के भरोसे छुट्टा पशुओं को जिंदा रखने की कोशिश की जा रही है।
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एसडीएम निचलौल देवेंद्र कुमार का कहना है कि गोसदन में पहले से जो गायें रखी गई हैं, उनकी मौत नहीं हो रही है। दूसरी जगह से जिन छुट्टा पशुओं को यहां लाकर रखा गया है, उनकी मौत हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि छुट्टा पशु प्लास्टिक आदि खाए रहते हैं और प्लास्टिक खाने के कारण पशु चारा आदि नहीं पचा पाते हैं। धीरे-धीरे कमजोर होने पर उनकी मौत हो जाती है। उनका कहना है कि प्रशासन की तरफ से गोसदन में गायों को रखने का उचित प्रबंध किया गया है।
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उधर, गो-सदन में गायों के स्वास्थ्य की जांच के लिए तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि प्रत्येक मवेशी की प्रतिदिन की खुराक के लिए 30 से 35 किलो चारा की व्यवस्था की गई है। मृत गायों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्लास्टिक मिल रही है। प्लास्टिक खाने वाले मवेशियों की मौत होती है। हालांकि समय-समय पर देखरेख कर पशुओं का इलाज किया जाता है।
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