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वर्ष 2014 के बराबर भी वोट नहीं प्राप्त कर सका गठबंधन

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2014 के बराबर भी वोट नहीं प्राप्त कर सका गठबंधन
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कहीं गुटबाजी तो कहीं भीतरघात से गठबंधन की गणित गड़बड़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। वर्ष-2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पंकज चौधरी को बड़ा जनादेश मिला है। जबकि अन्य प्रत्याशियों की स्थिति बदतर देखने को मिली। सबसे अहम बात है कि बढ़े हुए मतदाता और मतदान प्रतिशत का लाभ मिलने की बात तो दूर वर्ष-2014 की लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा को मिले वोट के बराबर भी गठबंधन प्रत्याशी को मत हासिल नहीं हो पाए। लोगों का कहना है कि कहीं गुटबाजी तो कहीं भीतरघात से गठबंधन की गणित गड़बड़ा गई।
2014 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों को मिले वोटों पर गौर किया जाए तो बसपा और सपा को करीब 4.45 लाख मत मिले थे। तब बसपा के काशीनाथ शुक्ला को करीब 2.31 लाख तो सपा के अखिलेश सिंह को करीब 2.13 लाख वोट मिले थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा व सपा मिलकर चुनाव लड़े। फिर भी गठबंधन को करीब 3.85 लाख वोट प्राप्त हो सके। 2014 के चुनाव की अपेक्षा इस चुनाव में गठबंधन को करीब 59 हजार वोट नहीं मिलने के पीछे राजनीतिक गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है। कुछ लोगों का कहना है कि एक तो गठबंधन प्रत्याशी देर से घोषित होना, गुटबाजी और भीतरघात की वजह से गठबंधन की गणित गड़बड़ा गई। मतलब बढ़े हुए मतदाता और मतदान प्रतिशत का लाभ मिलने की बात तो दूर परंपरागत मत भी पूरी तरह से गठबंधन के खाते में नहीं गए। वैसे गुटबाजी और भीतरघात के मुददे पर कोई कार्यकर्ता मुखर नहीं हो रहा है, लेकिन गणित गड़बड़ाने की बात उनके मन में चुभ रही है। कार्यकर्ता इसे लेकर मंथन कर रहे हैं। बसपा एवं सपा जिलाध्यक्ष के मुताबिक हार के कारणों पर विचार किया जाएगा।
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पिता से आगे निकली बेटी

अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। 2014 की लोकसभा तुलना में 2019 में कांग्रेस को अधिक जनादेश मिला।जनादेश प्राप्त करने बाप से आगे बेटी निकल गई। मतलब 2014 में जहां कांग्रेस प्रत्याशी रहे स्व. हर्षवर्धन को करीब 57 हजार वोट मिले थे। 2019 की चुनाव में उनकी बेटी सुप्रिया श्रीनेत को करीब 72 हजार वोट मिले। दो बार हर्षवर्धन ने संसद में जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। कांग्रेस के मतों की तुलना 2014 एवं 2019 से की गई है। इस तुलना के आधार पर सुप्रिया ने पिता से ज्यादा मत प्राप्त किए हैं। चुनाव के महज एक माह पहले महराजंगज संसदीय क्षेत्र में अपने पिता स्व. हर्षवर्धन की राजनीतिक विरासत संभालने मैदान में उतरी सुप्रिया श्रीनेत ने एक महीने में ही पूरे जिले में सभा की। कम समय में जिले के हर गांव से लेकर हर मजरों तथा चौखटों तक पहुंच गई। प्रखर वक्ता व स्पष्टवादिता की वजह से लोग सुप्रिया में उनके पिता वाली जुझारू छवि देखने लगे। इसका नतीजा रहा कि पहले ही चुनाव में मोदी की सुनामी में 2014 की तुलना में कांग्रेस ने अधिक जनादेश प्राप्त किया। चुनावी परिणाम चाहे जो भी आया, लेकिन उनमें अभी भी जनसेवा का जज्बा देखने को मिल रहा है। कुछ अन्य दलों के कार्यालय जहां चहल पहल नहीं हैं, वहीं सुप्रिया श्रीनेत का कार्यालय पूर्व की भांति शुक्रवार को भी खुला। वहां पर उनके कार्यकर्ता बैठ कर मंथन करते देखे गए। मतगणना समाप्ति के बाद जनादेश आने के बाद सुप्रिया श्रीनेत ने संदेश दे दिया कि वे जनपद वासियों के सुख-दुख में शामिल होती रहेंगी, जनहित के मुददे पर संघर्ष भी करती रहेंगी।
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