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दाल महंगी, आटा के दाम में भी 10 रुपये वृद्धि

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दाल और रोटी पर महंगाई की मार
खाद्य पदार्थों के मूल्य में वृद्धि से ढाबों पर महंगी हो सकती थाली
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। दाल पर महंगाई की मार ने लोगों का जायका बिगाड़ दिया है। रोटी पर भी महंगाई की मार पड़ी है। दाल जहां प्रति किलो 5 रुपये महंगा हुआ है, वहीं आटे की कीमत में भी वृद्धि हुई है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती महंगाई से ढाबों पर थाली महंगी हो सकती है। दुकानदारों का अनुमान है कि खाद्य पदार्थों के मूल्य में अभी और वृद्धि हो सकती है। इससे रसोई का बजट बिगड़ सकता है।
महंगाई से लोगों का बजट बिगड़ गया है। खाद्य पदार्थ महंगे होते जा रहे हैं। इस महंगाई में दाल ने भी रफ्तार पकड़ ली है। ऐसी कोई दाल नहीं जिसकी कीमत में प्रति किलो पांच रुपये तक की वृद्धि न हुई हो। यही नहीं, अभी यह भी कहा जा रहा है कि दाल और भी महंगी हो सकती है। आटे के दाम में भी प्रति किलो की दर से काफी वृद्धि हुई है। दाल के दाम बढ़ने से ढाबों में थाली महंगी हो सकती है। ढाबा संचालक रमेश कहते हैं कि अगर एक सप्ताह या दस दिन में दाम नहीं घटे तो प्रति थाली भोजन का मूल्य बढ़ाना पडे़गा। थोक केराना व्यवसायी अशोक कुमार टिबडे़वाल कहते हैं कि अरहर की दाल पहले 60 रुपये प्रति किलो थी और अब 65 रुपये प्रति किलो हो गई है। मसूर पहले 48 रुपये प्रति किलो थी, अब 53 रुपये हो गई है। इसी तरह उड़द काली 55 से बढ़कर 60 रुपये, काबुली चना 75 से बढ़कर 80 रुपये, चना दाल 55 से बढ़कर 60 रुपये, मसूर दाल 55 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो बिक रही है। आटा 10 किलो का पैकेट पहले 340 रुपये में बिकता था। अब 350 रुपये में बिक रहा है। दाल के मूल्य में अभी थोड़ी और बढ़ोत्तरी हो सकती है। गृहणी ममता देवी कहते हैं कि महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है। दाल महंगी हो गई है। अब हिसाब से ही दाल खरीदना पड़ रहा है। सारिका त्रिपाठी का कहना है कि महंगाई के कारण बजट बिगड़ गया है। अगर इसी तरह महंगाई बढ़ती रही तो थोडे़ में काम चलाने की आदत डालनी पडे़गी। महंगाई के हिसाब से आमदनी नहीं बढ़ रही है। ऐसे में दिक्कत तो होनी ही है।
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अर्थशास्त्री डॉक्टर प्रभाकर दूबे ने बताया कि महंगाई दर का असर अर्थव्यवस्था पर दो तरह से होता है। यदि महंगाई बढ़ती है तो बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। वहीं यदि महंगाई दर घटती है तो बाजार में वस्तुओं के दाम घट जाते और लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है। महंगाई बढ़ने और घटने का असर सरकार की नीतियों पर भी पड़ता है।
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