बृहस्पतिवार से एमआरपी अनिवार्यता के नियम में मिली आंशिक छूट
जाम लगने से आम राहगीरों और स्थानीय लोगों की भी बढ़ी समस्या
सोनौली। नेपाल सीमा स्थित सोनौली बॉर्डर पर इन दिनों ट्रकों का जाम लगातार बढ़ता जा रहा है। नेपाल में कई तरह के उत्पाद ले जा रहे करीब दो हजार मालवाहक ट्रक भारतीय सीमा में फंसे हुए हैं। जाम की वजह से सोनौली सीमा शून्य से लेकर नौतनवा बाईपास तक करीब 14 किलोमीटर की दूरी तक वाहनों की कतार लग गई है। बृहस्पतिवार से एमआरपी के नियमों में आंशिक रूप से छूट दी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल सरकार की ओर से तैयार सामानों पर एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) अनिवार्य किए जाने के बाद नेपाल भंसार परिसर में भारतीय ट्रकों की जांच प्रक्रिया सख्त हो गई थी। इसी कारण बीते शनिवार से बड़ी संख्या में ट्रक सीमा पर रुक गए हैं। बढ़ते जाम को देखते हुए बृहस्पतिवार से एमआरपी अनिवार्यता में आंशिक छूट दिए जाने की जानकारी सामने आई है लेकिन इसके बावजूद ट्रकों की आवाजाही सामान्य नहीं हो सकी है। सोनौली सीमा पर भारतीय क्षेत्र में ट्रकों का जाम 14 किमी दूरी तक लग गया है।
नेपाल में भारतीय ट्रकों की एंट्री की रफ्तार काफी धीमी होने से सोनौली बॉर्डर की एक लेन पूरी तरह जाम हो गई है। वाहन रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रहे हैं। जाम के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। वहीं, भारत से नेपाल निर्यात के लिए जरूरी सामान लेकर पहुंचे सैकड़ों ट्रक चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते जाम से आम राहगीरों, स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था सुचारु करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी है। नेपाल भंसार एजेंट संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शांत कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार की तरफ से रास्ते में पुराने एग्रीमेंट और पूर्व में खोले गए बैंक गारंटी के सामानों को आज से पास करने की अनुमति मिली है। गोदाम में एमआरपी का उल्लेख कर कानूनी प्रकिया पूरी करने की शर्त पर सामानों को पास कराया जा रहा है। नए सामानों के आने पर एमआरपी जरूरी है।
सोनौली बॉर्डर के जाम से बदला नेपाल का ट्रेड रूट
सोनौली बॉर्डर पर पिछले एक सप्ताह से लगे मालवाहक ट्रकों के भीषण जाम का असर अब नेपाल के व्यापार और आयात व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। लगातार लग रहे जाम से परेशान नेपाल के कारोबारियों और उद्योगपतियों ने अब अपना ट्रेड रूट बदलते हुए बढ़नी, ठूठीबारी और खुनुवा बॉर्डर से माल मंगाना शुरू कर दिया है। सोनौली भारतीय सीमा क्षेत्र में लगे जाम के कारण नेपाल के व्यापारियों का सामान लेकर पहुंचे सैकड़ों ट्रक फंस गए हैं। ट्रकों की धीमी एंट्री और लंबी प्रतीक्षा के कारण उद्योगों के संचालन पर असर पड़ने लगा, जिसके बाद व्यापारियों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। भारतीय सीमा में लगातार लग रहे जाम को लेकर उद्योग वाणिज्य संघ ने चिंता व्यक्त करते हुए भारत और नेपाल दोनों देशों के अधिकारियों से समस्या के समाधान की मांग की है। नेपाल के व्यापारियों का कहना है कि ट्रकों की नेपाल एंट्री को लेकर गंभीर समस्या बनी हुई है और नेपाल प्रशासन को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उद्योग वाणिज्य संघ के महासचिव कृष्णा प्रसाद धिमीरे ने बताया कि सोनौली सीमा पर जाम की स्थिति को देखते हुए अब भारतीय वाहन मालिक और चालक इस रूट पर आने से बच रहे हैं। उद्योगों को चालू रखने के लिए ट्रेड रूट बदलना मजबूरी बन गया है। राइस मिल मालिक राम थापा ने बताया कि बढ़नी और खुनुवा बॉर्डर से आने वाले वाहन एक ही दिन में फैक्ट्री पहुंचकर माल खाली कर वापस लौट जा रहे हैं, जबकि सोनौली मार्ग पर ट्रकों के कई दिनों तक फंसे रहने से भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश ट्रक मालिकों ने सोनौली बॉर्डर के रास्ते माल बुकिंग बंद कर दी है। प्रभारी कोतवाल रामचंदर राय ने बताया कि नेपाल भंसार कार्यालय में एमआरपी के कारण रुकी गाड़िया पास होनी शुरू हो गयी है। नेपाल के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है।
सड़क पर रात काटने को मजबूर चालक
भारत-नेपाल सीमा स्थित सोनौली बॉर्डर पर लगे भीषण जाम ने मालवाहक ट्रक चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। सीमा पर ट्रकों की लंबी कतार लगने से चालक कई दिनों से सड़क किनारे ही रात गुजारने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि चालक ट्रकों के नीचे खाना बनाकर भोजन कर रहे हैं और वहीं आराम करने को विवश हैं।
स्पीकअप
बनारस से कोयला लादकर सोमवार को सोनौली पहुंचे थे। नवलपरासी में माल खाली करना है लेकिन बीते चार दिनों से सीमा पर फंसे हुए हैं। अब खाने-पीने तक के पैसे खत्म होने लगे हैं और भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
-गोपाल यादव, ट्रक चालक, निवासी गोरखपुर
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मंगलवार को बनारस से कोयला लेकर आए थे। भैरहवा स्थित सीमेंट फैक्ट्री में माल खाली करने जाना है, लेकिन तीन दिनों में वाहन पांच सौ मीटर भी आगे नहीं बढ़ पाया। यदि यही स्थिति रही तो दोबारा सोनौली बॉर्डर के लिए माल लोड नहीं करेंगे।
-पंकज प्रजापति, चालक, देवरिया