राज्य कर के विशेष अनुसंधान शाखा लखनऊ की जांच में सामने आई सच्चाई
एसाआईबी लखनऊ ने जीएसटी नहीं चुकाने वाले ठेकेदारों की सूची सहायक कमिश्नर महराजगंज भेजी, रिटर्न का डेटा मांगा
महराजगंज। राज्य कर की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) लखनऊ ने जिले 137 ऐसे ठेकेदारों को चिह्नित किया है, जिन्होंने करोड़ों की कमाई के बावजूद जीएसटी नहीं चुकाया है। एसआईबी की जांच में पता चला है कि इन ठेकेदारों ने जीएसटी का भुगतान नहीं करने के लिए कागजों में शून्य कारोबार दिखाया है। लखनऊ एसआईबी ने जनपद के अधिकारियों से इन ठेकेदारों के रिटर्न का डेटा मांगा है।
जानकारी के अनुसार, जिले के 137 ठेकेदारों ने सरकारी काम कराकर करोड़ों रुपये की कमाई की लेकिन जीएसटी देने से बचने के लिए कागजों में कारोबार को शून्य दिखा दिया। इन ठेकेदारों ने राज्य कर विभाग को जीएसटी न देकर लाखों का टैक्स बचा लिया। विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा की पड़ताल में पता चला है कि करोड़ों कमाने के बावजूद ठेकेदारों ने एक भी रुपया जीएसटी के रूप में जमा नहीं किया।
जीएसटी चुकाने से बचने के लिए कागजों में हेरफेर करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ राज्यकर विभाग सख्त हो गया है। राज्य कर की विशेष अनुसंधान शाखा लखनऊ ने जीएसटी नहीं चुकाने वाले ठेकेदारों की सूची सहायक कमिश्नर महराजगंज भेजते हुए इनके रिटर्न का डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभागीय जांच की भनक लगते ही ऐसे ठेकेदारों में हड़कंप है।
जीएसटी राज्यकर कार्यालय महराजगंज अधिकारियों के अनुसार जीएसटी चोरी पकड़ने के लिए विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) नियमित जांच और कार्रवाई करती है। एसआईबी ने कुछ ऐसे ठेकेदारो का डेटा मांगा है जो निर्माण व आपूर्ति से जुड़े सरकारी काम करते हैं लेकिन जीएसटी चुकाने से बचने के लिए कारोबार को शून्य दिखा रहे हैं। जबकि सरकारी विभाग ठेकेदारों को भुगतान करते समय नियमानुसार दो प्रतिशत जीएसटी-टीडीएस काटते हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये के कार्य करने वाली फर्मों के मासिक और त्रैमासिक जीएसटी रिटर्न में शून्य कारोबार दर्शाना गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
340 सरकारी ठेकेदारों की जांच
जीएसटी राज्यकर कार्यालय महराजगंज उपायुक्त हरिवंश प्रसाद के मुताबिक जनपद में 340 सरकारी ठेकेदार विभिन्न विभागों में निर्माण और अन्य कार्य कर रहे हैं। एसआईबी की राज्य व क्षेत्रीय शाखा ने सरकारी ठेकेदारों की फर्मों की गोपनीय जांच की। जांच के दौरान कई फर्मों के रिटर्न और सरकारी भुगतान के बीच बड़ा अंतर मिला। इसके बाद ऐसे फर्मों को चिह्नित किया गया जिनके रिटर्न और सरकारी भुगतान में अधिक अंतर है। इनकी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी फर्में राज्य व सेंट्रल जीएसटी में पंजीकृत हैं। विस्तृत रिपोर्ट सेंट्रल जीएसटी को जांच शाखा ने भेजी है और वहां से भी मामले की पड़ताल की जाएगी।
राज्य और केंद्र को देना होता है नौ-नौ फीसदी जीएसटी
जीएसटी राज्यकर कार्यालय महराजगंज उपायुक्त हरिवंश प्रसाद के अनुसार, ठेकेदारों को एक करोड़ रुपये की आय पर 9 फीसदी स्टेट व 9 फीसदी केंद्रीय जीएसटी नियमत: भुगतान करना चाहिए। राज्य और केंद्र की जीएसटी का 18 फीसदी भुगतान करने के बाद कुल राशि का दो फीसदी ठेकेदारों को छूट के रूप में वापस कर दिया जाता है।
वर्जन
राज्य कर विशेष अनुसंधान शाखा की तरफ से जांच-पड़ताल किया गया। कुल 137 सरकारी ठेकेदार के जीएसटी रिटर्न में गड़बड़ी मिली है। इनका डेटा क्षेत्रीय कार्यालय भेजा जाएगा। जांच व नोटिस की कार्रवाई राज्य स्तर से ही होगी।
- हरिशंकर प्रसाद, उपायुक्त जीएसटी राज्यकर, महराजगंज।