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Maharajganj News: रेंगहिया गांव में छापा मारकर एक घर से 119 बोरी चाइनीज लहसुन बरामद, एक गिरफ्तार

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एसएसबी, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
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रेंगहिया निवासी धर्मेंद्र सिंह के घर पर छापा मारकर लहसुन किया बरामद, ठूठीबारी थाना क्षेत्र के डिगही निवासी गिरिजेश को किया गिरफ्तार
निचलौल। एसएसबी, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को रेंगहिया गांव में छापेमारी कर एक घर से 119 बोरी चाइनीज लहसुन बरामद किया। कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया। बरामद लहसुन को कस्टम कार्यालय निचलौल को सौंप दिया गया।
नायब तहसीलदार पियूष जायसवाल, एसएसबी शीतलापुर और शीतलापुर चौकी प्रभारी सूरज तिवारी के नेतृत्व में टीम ने मुखबिर की सूचना पर रेंगहिया निवासी धर्मेंद्र सिंह के घर पर छापा मारा। तलाशी के दौरान घर में छिपाकर रखी गई चाइनीज लहसुन की 119 बोरियां बरामद हुईं। मौके से गिरिजेश निवासी डिगही, थाना ठूठीबारी को गिरफ्तार किया गया। मौके पर धर्मेंद्र नहीं मिला। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
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नायब तहसीलदार पियूष जायसवाल ने बताया कि सीमा सुरक्षा एजेंसी को सूचना मिली थी कि रेंगहिया गांव में एक घर में चाइनीज लहसुन की बड़ी खेप छिपाकर रखी गई है। सूचना के आधार पर टीम गठित कर छापेमारी की गई। बरामद लहसुन को कस्टम निचलौल को सौंप दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बृहस्पतिवार को भी पकड़ी गई थी 30 बोरी लहसुन की खेप
सीमावर्ती क्षेत्र में तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का यह सिलसिला लगातार जारी है। बृहस्पतिवार को भी ग्रामसभा शीतलापुर खेसरहा में एक घर में छिपाकर रखी गई 30 बोरी चाइनीज लहसुन और सात बोरी कद्दू के बीज बरामद किए गए थे। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके एक दिन बाद रेंगहिया में 119 बोरी की बरामदगी ने सीमा क्षेत्र में सक्रिय तस्करी नेटवर्क को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल सीमा पर चाइनीज लहसुन की तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। सीमावर्ती गांव अब तस्करों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनते जा रहे हैं। दिन के समय गांवों में घरों और अन्य स्थानों पर लहसुन की खेप एकत्र की जाती है और रात के अंधेरे में पगडंडी रास्तों के जरिए इसे सीमा पार कराने का खेल चल रहा है।


सीमाई गांवों में दिन में संग्रह कर रात में भेजते हैं सीमा पार

सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के अनुसार कनमिसवा, मटरा धमऊर, भरवलिया, राजाबारी और बहुआर सहित कई गांवों के पगडंडी मार्ग तस्करों के लिए मुफीद बने हुए हैं। आरोप है कि रात में साइकिल और छोटे वाहनों के जरिए लहसुन की खेप एक से दूसरे स्थान तक पहुंचाई जाती है। वहां माल एकत्र करने के बाद बड़ी खेप तैयार कर वाहनों के माध्यम से दूसरे शहरों के लिए भेजने का काम किया जाता है। छोटे-छोटे समूहों में कैरियरों के माध्यम से माल पहुंचाते हैं। गिरोहों के बीच विवाद या वर्चस्व की लड़ाई होने पर एक-दूसरे की खेप की सूचना सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचने से कई बार बड़ी बरामदगी हो जाती है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कीमतों का अंतर तस्करों के लिए बना मुनाफे का जरिया
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार भारत और नेपाल में लहसुन की कीमतों में अंतर होने से तस्करों को मुनाफा मिलता है। व्यापारियों के मुताबिक भारतीय बाजार में लहसुन करीब 120 से 125 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि नेपाल में इसकी कीमत लगभग 80 से 85 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बताई जा रही है। इसी अंतर का फायदा उठाकर प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन की तस्करी किए जाने की बात सामने आती रही है।
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2014 से चाइनीज लहसुन के आयात पर लगा है प्रतिबंध

चाइनीज लहसुन के आयात पर केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2014 से प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद सीमावर्ती क्षेत्रों में इसकी लगातार बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है। पूर्व में निचलौल और ठूठीबारी के व्यापारियों द्वारा विभिन्न राज्यों के लिए भेजी गई लहसुन की बड़ी खेप रास्ते में गायब होने के मामले भी सामने आए थे। इस पर तत्कालीन नवीन मंडी सचिव ने संबंधित कारोबारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।
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