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व्यर्थ न जाए शहादत, बचने न पाएं आतंकी

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फरेंदा के शहीद पंकज त्रिपाठी के गांव में लोग दुखी ही नहीं आक्रोशित भी
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज/फरेंदा। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में वृहस्पतिवार को हुए आत्मघाती हमले में फरेंदा के लाल पंकज त्रिपाठी के शहीद होने का हरपुर के बेलहिया गांव में गम तो दिखा ही लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश भी देखा गया। उनका कहना था पंकज और अन्य जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। जिसने भी इस घटना को अंजाम दिया है, वह बचने न पाए। भारत सरकार से ऐसी कार्रवाई की उम्मीद है।
फरेंदा तहसील क्षेत्र के हरपुर के बेलहिया निवासी ओमप्रकाश त्रिपाठी के बेटे पंकज त्रिपाठी (26) देश की सेवा के लिए 2012 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर के पुलवामा में थी। सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले की जानकारी घर वालों को टीवी से हुई। इसके बाद वे बेटे की कुशलता और अनहोनी की आशंका से परेशान हो गए। उन्होंने बार-बार फोन लगाना शुरू किया पर कुछ पता नहीं चला। काफी देर बाद आई कंपनी कमांडर की फोन कॉल से पता चला कि हरपुर का लाल पंकज त्रिपाठी भी शहीदों में शामिल है। पिता ने कलेजे पर पत्थर रखकर यह जानकारी पत्नी सुशीला देवी और बहू रोहिनी को दी तो वे बेसुध हो गए।
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पंकज त्रिपाठी की प्रारंभिक शिक्षा अभिनव विद्या मंदिर इंटर कॉलेज उदितपुर से हुई थी। उन्होंने इंटर की पढ़ाई सेठ आनंदराम जयपुरिया इंटर कॉलेज से की थी, जबकि स्नातक अमृतलाल महाविद्यालय बैकुंठपुर से किया था। बाबा के निधन पर वह छ़ुट्टी पर घर आए थे। दो माह 17 दिन छुट्टी पर रहने के बाद रविवार को वह ड्यूटी पर गए थे, लेकिन वृहस्पतिवार को ही आत्मघाती हमले में शहीद हो गए।
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डीएम अमरनाथ उपाध्याय ने हरपुर बेलहिया निवासी सीआरपीएफ जवान पंकज त्रिपाठी के बलिदान को कोटि-कोटि नमन किया। कहा कि ईश्वर शहीद के घर वालों को इस असीम वेदना को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। एसपी रोहित सिंह सजवान ने देश विरोधी ताकतों से लड़ने में शहीद हुए पंकज की सहादत को सलाम किया। कहा कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
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