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Maharajganj News: दिवाली पर वनटांगियों को मिलेगा वन संसाधनों के उपयोग का अधिकार

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महराजगंज। दिवाली पर्व इस बार जनपद के 18 गांवों के वनटांगिया परिवारों के लिए खास होगा। उन्हें दिवाली पर वन संसाधनों के उपयोग का अधिकार मिल सकता है। लगभग 100 वनटांगिया इस बार दिवाली पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ गोरखपुर में दिवाली मनाएंगे।
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दिवाली का पर्व जनपद के 18 वनटांगिया समुदाय के लोगों के बीच अलग ही अहमियत रखता है। वनटांगिया समुदाय के लोगों के लिए यह दिन पुराने संघर्षों को याद करने के साथ नए सार्थक संघर्ष की तरफ बढ़ने का होता है। इस बार भी दिवाली की आमद के बीच जनपद के 18 गांव में रहने वाले 35 हजार वनटांगिया परिवार तैयारियों में जुटे हैं।
महराजगंज वनटांगिया सरपंच जयराम प्रसाद के मुताबिक उनके समुदाय का संघर्ष हक व अधिकार के लिए ऐसे तो 100 वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन संघर्षों के बल पर क्या पाया और क्या अगली बार पाना है इसको तय करने का काम पिछले 17 वर्षों से चल रहा है। यह वह महत्वपूर्ण दिन होता है जब वनटांगिया समुदाय उनके संघर्षों को पहचान दिलाने वाले एक योगी के सानिध्य में पहुंचकर उनके साथ दीपोत्सव मनाते हैं। इस बार भी दिवाली पर 18 वनटांगिया गांव से गोरखपुर के तिनकोनिया जंगल नंबर तीन योगी आदित्यनाथ संग दीपोत्सव मनाने जाएंगे। इस बार वनटांगिया समुदाय को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस बार सामुदायिक अधिकार का तोहफा उन्हें दे सकते हैं।
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मुख्यमंत्री बनते ही दिलवाया भूमि अधिकार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वनटांगिया प्रेम की परंपरा की अगली कड़ी है। मुख्यमंत्री 2009 से, जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब से अपनी हर दिवाली वनटांगिया समुदाय के बीच ही मनाते आ रहे हैं। हर साल वह उनके लिए कोई नया तोहफा लेकर जाते हैं। कभी राजस्व ग्राम का दर्जा, कभी पक्का मकान, कभी बिजली-पानी। इस बार की दिवाली का तोहफा संसाधनों के उपभोग का अधिकार का मिल सकता है। आजादी के 70 साल बाद भी वन विभाग का बंधुआ मजदूर ही समझा गया। लेकिन 2017 में योगी सरकार ने इन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा देकर राशन कार्ड, आधार, आवास, शौचालय, पेंशन जैसी सुविधाएं दीं। अब अगला कदम संसाधन अधिकार है। अधिकार मिलने के बाद यह समुदाय जंगल की लकड़ी, पत्ते, फल, शहद जैसी वन उपज का वैध रूप से संग्रह और विक्रय कर सकेगा।

यह मिला-
2017 में वनटांगिया बस्तियों को राजस्व ग्राम घोषित किया गया। जिसके बाद वनटांगिया गांव को सरकारी कल्याण कार्यक्रम का फ़ायदा मिला। 2018 में, लगभग 215 लाख रुपये के प्रोजेक्ट तो 2019 में लगभग 1.32 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट इन गांव के विकास व संसाधन बढ़ोतरी पर खर्च हुए। इसमें स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क, नाली, खड़ंजा, आरसीसी सड़क, मुख्य मार्ग तक संपर्क मार्ग आदि शामिल हैं। अब तक 1200 शौचालय और 27 सौ घर बन चुके थे, सौभाग्य योजना से 750 को निशुल्क कनेक्शन व 1000 से अधिक को सोलर पैनल। अंत्योदय का लाभ लगभग दो हजार से अधिक को मिल रहा। वनटांगिया के 18 गांव भौतिक विकास की कहानी से कहीं ज़्यादा प्रशासनिक बदलाव को दिखाता है। राजस्व ग्राम की पहचान ने पंचायती राज संस्थाओं और सरकारी योजनाओं के लिए दरवाज़े खोले, जबकि सड़कें, घर, बिजली, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सफ़ाई और सामाजिक सुरक्षा के फ़ायदों ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बेहतर बनाया गया है।
यह मिलना शेष-
सामुदायिक संसाधन के उपभोग का अधिकार। चकबंदी धारा पांच श्रेणी की हुई, जबकि एक ही गांव में वनटांगिया की जमीनें एकत्र हो सकें इसके लिए श्रेणी 2 की चकबंदी। वन उपज पर पहला अधिकार। कौशल विकास व स्थायी रोजगार के लिए कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं। अलग ग्राम पंचायत का दर्जा, वनटांगिया को पट्टे तो मिल रहे हैं, लेकिन राजस्व अभिलेखों में भूमि का पूर्ण रूप से उनके नाम दर्ज होने और वन विभाग के नाम से हटने की कागजी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।

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बोले वनटांगिया गांवों के लोग
वनटांगिया सिर्फ मजदूर नहीं, जंगल के वैद्य हैं। हमारे बुजुर्गों ने पीढ़ियों से औषधियों का ज्ञान संजोया है। छाल, फूल, जड़, बीज से हम कई बीमारियों का इलाज करते हैं। अब संसाधन अधिकार मिलने से हम इस ज्ञान को और मजबूती से बचाकर रख पाएंगे।
जयराम, सरपंच, वनटांगिया


खुर्रमपुर नर्सरी में हम कई तरह के औषधीय पौधे उगाते हैं। हमारे समुदाय को पौधों से दवा बनाना आता है। त्वचा, सांस, पेट और आंखों के रोगों में हमारी दवाएं असरदार हैं। यह ज्ञान किताबों से नहीं, दादा-परदादा से मिला है।
- वीरेंद्र कुमार, वनटांगिया
हमारे वैद्य रामफल जैसे बुजुर्गों को पता है कौन सी जड़ किस बीमारी में काम आती है। पीलिया, सांप काटने और स्त्री रोग संबंधी समस्याओं तक का इलाज हम जंगल से ही करते हैं। शहर की दवा महंगी है, हमारी दवा जंगल में ही है।
- राजाराम, वनटांगिया ग्रामीण
शहर बढ़ रहा है, पर हम आज भी प्रकृति के उपासक हैं। जंगल ही हमारा मंदिर, दवाखाना और घर है। हम चाहते हैं संसाधन अधिकार पत्र मिलने के बाद हमारे बच्चे भी इस ज्ञान को सीखें, ताकि पुरानी पीढ़ी का ज्ञान नई पीढ़ी तक पहुंचे और खत्म न हो।
- संदीप, युवा वनटांगिया
बोले अधिकारी
वनटांगिया समुदाय शासन की प्राथमिकता में हैं। इन्हें लगभग सभी योजना का लाभ प्राथमिकता के आधार पर दिलाया जा रहा है। इनके भूमि की श्रेणी परिवर्तन व सामुदायिक सहभागिता देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे इनकी जमीन एक जगह उपलब्ध हो सके और वन उपज पर इनका अधिकार पुख्ता हो सके।
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- महेंद्र कुमार सिंह, सीडीओ, महराजगंज
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