कांठ बवाल को जन्म खुद पुलिस अफसरों ने दिया। ये खुलासा एक आरटीआई से हुआ है। अकबरपुर चैदरी मंदिर के ताले तोड़कर जबरन लाउडस्पीकर उतरवाने वाले एसपी देहात अनिल कुमार सिंह ने जन सूचना अधिकारी की हैसियत से खुद यह सूचना आरटीआई में दी है कि नया गांव अकबरपुर चैदरी स्थित शिव मंदिर पर पूर्व से ही लाउडस्पीकर लगा था और ये तथ्य थाने के रिकार्ड में अंकित है। आरटीआई में एसपी देहात ने कहा है कि मंदिर पर लाउडस्पीकर किस दिनांक और किस वर्ष में लगाया गया इसकी सूचना थाने पर उपलब्ध नहीं है।
आरटीआई एक्टिविस्ट पवन अग्रवाल ने जन सूचना अधिकार के तहत एसपी देहात/जन सूचना अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने जानकारी मांगी थी कि कांठ थाना क्षेत्र में स्थित किन धार्मिक स्थलों पर पूर्व से ही लाउडस्पीकर लगे हुए हैं। जवाब में एसपी देहात अनिल कुमार सिंह ने कहा है कि सीओ कांठ से मिली सूचनाओं और पुलिस रिकार्ड के हिसाब से कांठ थाना क्षेत्र में कुल 143 धार्मिक स्थलों (मंदिर और मस्जिद) पर पूर्व से लाउडस्पीकर लगा है।
खास बात ये है कि एसपी देहात ने पूर्व से ही लाउडस्पीकर लगे हुए जिन धार्मिक स्थलों की सूची आरटीआई में दी है उसमें नया गांव अकबरपुर चैदरी का शिव मंदिर भी सूची में 23 वें स्थान पर दर्ज है। जबकि इस मंदिर से खुद एसपी देहात ने यह कहते हुए ताले तुड़वाकर लाउडस्पीकर उतरवा दिया था कि पहले लाउडस्पीकर नहीं था ये नई परंपरा डाली गई है। आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि कांठ क्षेत्र में धार्मिक स्थलों पर पूर्व से लगे लाउडस्पीकर किस तिथि में लगाए गए थे लेकिन पुलिस ने जवाब दिया कि वह यह नहीं जानती कि सभी 143 धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर किस वर्ष और किस दिनांक में लगे थे। पुलिस रिकार्ड में बस इतना दर्ज है कि इन सभी पर पूर्व से लाउडस्पीकर बजते आ रहे हैं।