संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर भले ही खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, लेकिन यहां हॉकी के लिए कोई मैदान न होने से स्थानीय प्रतिभा गली मोहल्ले तक सीमित होकर रह गई है। पहले यहां हॉकी का एक मैदान जीटीसी ग्राउंड था। जहां हॉकी और फुटबाल मैच खेले जाते थे। लेकिन, यहां मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग निर्मित हो जाने से यह खेल का मैदान भी गुम हो गया। यही कारण है कि जनपद में हॉकी का खेल खो गया। हॉकी के पूर्व खिलाड़ियों ने भी यहां कोई मैदान न हाेने से युवाओं में हॉकी के प्रति दिलचस्पी घटने की बात कही।
-
हाॅकी के जादूगर दद्दा के शहर झांसी से तो कई खिलाड़ियों ने देश के लिए हॉकी खेली। लेकिन, जनपद में हॉकी का कोई मैदान न होने के कारण यहां की प्रतिभा निखर नहीं सकी।
यूनिस खान, पूर्व हॉकी प्लेयर
-
जनपद के युवाओं में हॉकी की लोकप्रियता है और वह हॉकी खेलना भी चाहते हैं। लेकिन, यहां न तो हॉकी का मैदान है और न कोई क्लब है। इस कारण युवाओं के बीच हॉकी खत्म होती जा रही है।
ताहिर बेग, पूर्व हॉकी खिलाड़ी
जिले में सिर्फ एक स्टेडियम है। वह भी छोटा है। वह हॉकी खेलने के लिए अनुकूल नहीं है। पूर्व में जीटीसी ग्राउंड था, लेकिन वहां भी अब मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग बन गई।
आरिफ बेग, पूर्व हॉकी खिलाड़ी
यहां हॉकी खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जीटीसी ग्राउंड में हॉकी खेली जाती रही। अब यह ग्राउंड भी नहीं बचा। हॉकी के लिए पर्याप्त मैदान नहीं है। केवल एक मिनी स्टेडियम है, जिसके मैदान में घास है।
जनार्दन शुक्ला, वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी