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योगी की माया, युवाओं को भगवा भाया

Wed, 12 Apr 2017 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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yogi aadityanath - फोटो : demo
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इस गर्मी में केसरिया गमछों का जबर्दस्त क्रेज है। अमूमन मंदिरों के पुजारियों, कथावाचकों, साधु-संतों और भाजपाइयों की गले में भगवा पट्टिका देखी जाती, लेकिन अब तो युवाओं में इसका जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। अब इसे योगी के मुख्यमंत्री बनने का असर कहें, या फिर युवाओं की पसंद, हकीकत तो यह है कि भगवा गमछों की बिक्री में कई गुना उछाल है। 
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पिछले साल तक गर्मी के दौरान इक्का-दुक्का बिकने वाले सीतारामी और केसरिया गमछों की बिक्री में इस बार जबर्दस्त इजाफा है। दुकानदारों के झट स्टाक खत्म हो जाता है और उन्हें फिर आर्डर देना पड़ता है। मौका देख बाजार भी इस क्रेज को भुना रहा है। भगवा गमछे कई डिजाइनों और शेड में उपलब्ध हैं। साटन, टेरीकाट, सूती और सिल्क के गमछे और पट्टियां खूब बिक रही हैं। ज्यादा डिमांड को सूती और टेरीकाट की है। बाजारों में बाहर तक भगवा गमछे टंगे नजर आ रहे हैं। धूप में कोई सिर, चेहरे पर बांधे दिखता है तो कोई गले में लटकाए घूम रहा है। पिछले साल तक सफेद, क्रीम और गुलाबी गमछों की बिक्री ज्यादा होती थी पर अब तो केसरिया की लहर है। बनारस, रानीपुर और चिदबंरम के गमछे कई आकर्षक डिजाइनों में बिक रहे हैं। राजस्थान के पाली मारवाड, फैजाबाद के टांडा, तमिलनाडु के इरोड और चिदंबरम से बड़े पैमाने पर गमछे मंगवाए जा रहे हैं।

टक्कर दे रहा रानीपुर का कॉटन
कॉटन गमछा 50 , टांडा कॉटन 40, मऊनाथ भंजन कॉटन 60 , बनारस सिल्क 600 , बनारसी काटन 80, साउथ कॉटन100, चिदंबरम प्योर सिल्क 750, रानीपुर काटन 60 रुपये में उपलब्ध है। विक्रेताओं के अनुसार पिछले साल के मुकाबले दाम में कोई खास बढ़ोतरी नहीं है।
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कै प नहीं अब केसरिया गमछा
 युवा पहले धूप से बचने के लिए कै प, सफेद या फिर क्रीम गमछा खरीदते थे पर अब भगवा, केसरिया और प्रिंटेड सीतारामी गमछे का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। बिक्री भी बढ़ी है।
सिंघई जवाहर लाल, थोक व्यापारी
 
युवाओं की है पसंद
प्रदेश में भाजपा सरकार आते ही, भगवा और रामनामी गमछे मंगवा लिए थे। इनकी बिक्री कई गुना बढ़ गई है। हर दिन कई दर्जन गमछे बिक जाते हैं। इसके युवा ग्राहक ज्यादा हैं।
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नईम, फुटकर विक्रेता

अच्छा लगता है
रामनामी गमछा गले में डालकर अच्छा लगता है। पूजापाठ करने वाला दिखता हूं। धूप से भी बचाता है और अच्छा अहसास होता है।
अतुल खरे

फैशन न समझें इसे
इनदिनों में ज्यादातर साथी केसरिया और रामनामी गमछा पहने है। मुझे भी अच्छा लगा तो पहन लिया। इसे फैशन नहीं समझा जाए।
हृदेश
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